नीमच। श्री सीताराम जाजू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नीमच में सेवा पखवाड़ा 2025 के अंतर्गत ‘‘ऊर्जा संरक्षण पर संवाद’’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भौतिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रो. सुनील कुमार कुमावत ने ऊर्जा संरक्षण का महत्व बताते हुए कहा कि इसका अर्थ है ऊर्जा की बर्बादी को कम करना और सोच-समझकर उसका उपयोग करना। उन्होंने ऊर्जा कुशल उपकरणों के प्रयोग और दैनिक आदतों में बदलाव लाने पर जोर दिया।
महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. पी.सी. रांका ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण पर्यावरण की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों की बचत, लागत कम करने और ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदूषण रहित और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश और ऊर्जा दक्षता में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. रश्मि हरित ने बताया कि सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोत रोजगार के नए अवसर उत्पन्न कर रहे हैं।
कार्यक्रम में छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कु. सपना बैरागी ने कहा कि सीमित संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग आवश्यक है। कु. लक्की पारवानी ने घरों में बिजली बचाने के उपाय बताए, जबकि कु. गुनगुन जैन ने उपकरणों की सफाई और आईएसआई मूहर वाले बिजली उपकरणों के प्रयोग से बिजली की बचत करने का सुझाव दिया। कु. तरन्नुम ने कहा कि ऊर्जा बचाकर देश की बहुमूल्य मुद्रा की रक्षा की जा सकती है।
कार्यक्रम के अंत में भौतिकी विभाग के डॉ. जी.आर. शर्मा ने बताया कि भारत में दुनिया की 16 प्रतिशत जनसंख्या रहते हुए केवल 1 प्रतिशत ऊर्जा संसाधन उपलब्ध हैं, इसलिए सौर और पवन ऊर्जा का अधिकतम उपयोग जरूरी है।
कार्यक्रम में प्रो. राजेश डोडिया, नरेन्द्र शर्मा, महेन्द्र राव, संगीता शर्मा, सिमरन सहित बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन प्रो. सुनील कुमावत ने किया और आभार डॉ. जी.आर. शर्मा ने व्यक्त किया।