नीमच/भोपालगढ़। राजस्थान के जोधपुर जिले के भोपालगढ़ विधानसभा क्षेत्र के हिरादेसर गांव के वीर सपूत और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) रामनिवास चौधरी ने मातृभूमि की सेवा करते हुए अपनी अंतिम सांस आज दिल्ली के एम्स अस्पताल में ली। वह नीमच फील्ड फायरिंग रेंज में चल रही ट्रेनिंग के दौरान ग्रेनेड विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुए थे। उनका यह बलिदान देश की सुरक्षा के प्रति अटूट समर्पण और साहस का प्रतीक है, जो सदैव स्मरणीय रहेगा।
ट्रेनिंग के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा-
26 सितंबर 2025 को मध्य प्रदेश के नीमच स्थित सीआरपीएफ रिकूट ट्रेनिंग सेंटर (सीआरपीएफ) में फील्ड फायरिंग एक्सरसाइज के दौरान एक ग्रेनेड के अचानक विस्फोट से एएसआई रामनिवास चौधरी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) में भर्ती कराया गया, जहां आज सुबह उन्होंने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
ट्रेनिंग सेशन के दौरान हुई घटना-
सीआरपीएफ के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह घटना ट्रेनिंग सेशन के दौरान हुई, जिसमें रामनिवास जी कमांडो के रूप में सक्रिय थे। हादसे के तुरंत बाद सीआरपीएफ की टीम ने बचाव और चिकित्सा कार्रवाई की, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
1968 से संचालित है सीआरपीएफ का सेंटर-
नीमच सीआरपीएफ, जो 1968 से संचालित हो रहा है, सीआरपीएफ के आठ प्रमुख ट्रेनिंग सेंटर्स में से एक है, जहां विभिन्न सुरक्षा बलों के जवान प्रशिक्षित होते हैं। इस हादसे ने पूरे बल और देशवासियों को स्तब्ध कर दिया है।
हिरादेसर के गौरव, देशसेवा का प्रतीक-
रामनिवास चौधरी मूल रूप से राजस्थान के जोधपुर जिले के भोपालगढ़ विधानसभा क्षेत्र के हिरादेसर गांव के निवासी थे। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले रामनिवास जी ने युवावस्था में ही सीआरपीएफ में भर्ती होकर देश सेवा का संकल्प लिया। आईएसए माउंट आबू से जुड़े होने के कारण वे विशेष सुरक्षा अभियानों में भी सक्रिय रहे।
बहादुरी और समर्पण के किस्से गांव में प्रचलित-
उनकी बहादुरी और समर्पण के किस्से गांव में प्रचलित हैं। वे न केवल एक कुशल कमांडो थे, बल्कि परिवार और समुदाय के लिए प्रेरणा स्रोत भी रहे। शहीद होने से पहले वे नियमित ट्रेनिंग और विशेष मिशनों में सक्रिय थे, जो उनकी व्यावसायिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनके निधन की खबर मिलते ही हिरादेसर गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने सड़कों पर काले झंडे लहराए और मातृभूमि के प्रति उनके सर्वाेच्च बलिदान को नमन किया।
सीआरपीएफ और स्थानीय नेताओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि-
सीआरपीएफ के महानिदेशक कुलदीप सिंह ने शहीद को नमन करते हुए कहा सीआरपीएफ शहीद के परिवार के साथ दृढ़ता से खड़ी है। नई दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारी और जवानों ने रामनिवास जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। सोशल मीडिया पर सीआरपीएफ के आधिकारिक हैंडल से जारी फोटोज में शहीद के पार्थिव शरीर को सलामी देते जवानों की तस्वीरें दिखाई गईं।
राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने व्यक्त किया शोक-
स्थानीय स्तर पर राजस्थान के राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने शोक व्यक्त किया। भोपालगढ़ क्षेत्र के एनएसयूआई कार्यकर्ता हनुमान तारड़ ने कहा, मातृभूमि हेतु उनका सर्वाेच्च बलिदान अमर रहेगा। ईश्वर परिवार को शक्ति दें। इसके अलावा युवा नेता दीपक जाखड़ और कांता ग्वाला ने भी शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। गांव के पूर्व सरपंच और ग्रामीण अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट गए हैं, जो हिरादेसर गांव में ही संपन्न होगा।
शोकाकुल परिवार-
शहीद रामनिवास जी एक पारिवारिक पुरुष थे। उनके परिवार में पत्नी, दो छोटे बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता शामिल हैं, जो हिरादेसर में रहते हैं। निधन की खबर मिलते ही पूरा परिवार शोक में डूब गया। पड़ोसियों के अनुसार रामनिवास परिवार के लिए कमाने वाले इकलौते सदस्य थे और उनकी अनुपस्थिति घर को सूना कर देगी। उनके छोटे बेटे ने कहा- पापा हमेशा कहते थे कि देश पहले है।
याद रहेगा रामनिवास चौधरी का बलिदान-
स्थानीय प्रशासन और सीआरपीएफ की टीम परिवार को सांत्वना देने और अंतिम संस्कार की व्यवस्थाओं में सहायता के लिए हिरादेसर पहुंच रही है। रामनिवास चौधरी का बलिदान न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।