कुकड़ेश्वर। नगर के सूर्यवंशी कुमरावत तंबोली समाज द्वारा कैशु बाऊजी का पांच दिवसीय जन्मोत्सव बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। यह अनूठा उत्सव विजयादशमी से शरद पूर्णिमा तक चलता है, जिसमें पूरे समाज के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। समाजजन जंगली तुलसी, बांस की सुतली, नारियल के छिलकों से कैशु बाऊजी की विशेष प्रतिमा बनाते हैं। इसमें अखंड ज्योत प्रज्वलित कर प्रतिदिन समाज के लगभग 400 परिवारों के घर-घर ले जाकर पूजा-अर्चना की जाती है।
अंतिम दो दिनों में कैशु बाऊजी की शाही बारात बैंड-बाजे, ढोल-धमाकों के साथ बड़े ही धूमधाम से निकाली जाती है। इस बारात में समाज के 50 से 100 सदस्य शामिल होकर उत्सव का उल्लास बढ़ाते हैं। परंपरा अनुसार बारात के बाद कैशु बाऊजी का विवाह मटकी रूपी दुल्हन से सम्पन्न होता है। इसके उपरांत प्रतिमा का विधिवत विसर्जन किया जाता है।
इस अवसर पर समाजजन लड्डू-बाटी का भोग लगाकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। तंबोली मोहल्ले को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और वातावरण भक्ति, उल्लास और उमंग से गूंज उठता है। यह पांच दिवसीय उत्सव सूर्यवंशी कुमरावत तंबोली समाज का प्रमुख पर्व माना जाता है, जिसमें लगभग 400 परिवार पूरे समर्पण और श्रद्धा के साथ भाग लेकर समाज की एकजुटता और परंपरा की अद्भुत मिसाल पेश करते हैं।