शाजापुर। शाजापुर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा शरद पूर्णिमा पर आयोजित भव्य कवि गोष्ठी में साहित्य प्रेमियों ने शब्दों के इंद्रधनुष का आनंद लिया। महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर 'पारिजात' (बी पी व्यास निवास) में आयोजित इस कार्यक्रम में कवियों ने अपनी रचनाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत बालचंद सूर्यवंशी की मधुर सरस्वती वंदना और कुमुद व्यास की गणेश वंदना से हुई। व्यास परिवार ने सभी कवियों का पुष्प गुच्छों से स्वागत किया।
कवियों की प्रस्तुति-
सज्जाद अहमद कुरैशी ने अपनी रचना "समर्पण आराधना" प्रस्तुत की।
राजकुमार अकेला ने "मेरा शाजापुर" के माध्यम से स्वच्छता संदेश दिया।
बालचंद सूर्यवंशी ने "छयरी रे चंदनी" से चांदनी रात का सौंदर्य उजागर किया।
जितेन्द्र देवतवाल 'ज्वलंत' ने "जितनी बात जुबां कह पाई, उतनी ही रह गईं अधूरी" रचना प्रस्तुत की।
कैलाश गोंड ने "चांद तेरे कितने नाम" से चंद्रमा के विभिन्न रूपों को प्रदर्शित किया।
हास्य और व्यंग्य से श्रोताओं को हंसाया एम डी दुबे।
लोकार्पण का गौरवपूर्ण क्षण-
शाम का मुख्य आकर्षण डॉ. दुर्गाप्रसाद झाला की नवीनतम काव्य-कृति ‘जो तुमको अर्थ दे’ का लोकार्पण रहा। परिषद के पदाधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में यह कृति पाठकों के लिए समर्पित की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संतोष शर्मा ने की। मुख्य अतिथि शाजापुरी और विशिष्ट अतिथि डॉ. विद्याशंकर विभूति ने कार्यक्रम को विशेष सम्मान प्रदान किया। संचालन जितेन्द्र देवतवाल 'ज्वलंत' ने किया और समापन पर बी पी व्यास ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में महेंद्र कुमार पाण्डेय, भैरवसिंह राठौर, जेपी गोठी सहित अन्य साहित्यकार उपस्थित रहे। शाजापुर की इस साहित्यिक संध्या ने कवियों और श्रोताओं के बीच गहरा संवाद स्थापित किया।