नीमच। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (इंडिया) ने शुक्रवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही होम डिलीवरी चार्ज और प्रशासनिक शुल्क में 75 की बढ़ोतरी नहीं की गई, तो देशभर के वितरक चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे।
एसोसिएशन की ओर से नीमच के अपर कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2019 तक वितरकों के चार्ज नियमित रूप से बढ़ाए जाते रहे, लेकिन वर्ष 2020 से अब तक लागत और महंगाई के अनुपात में कोई समुचित बढ़ोतरी नहीं हुई है। इससे वितरकों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
डिनोबा समिति की सिफारिशें अब तक लंबित-
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि डिनोबा समिति की सिफारिशों के अनुसार वितरकों को बढ़ती लागत के अनुरूप मुआवजा मिलना चाहिए था, लेकिन सरकार और तेल कंपनियों ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया। वितरकों का कहना है कि जब सरकारी कर्मचारी और तेल कंपनियों के अधिकारी हर साल महंगाई भत्ता (DA) प्राप्त करते हैं, तब एलपीजी वितरकों की अनदेखी अन्यायपूर्ण है।
आंदोलन की रूपरेखा तैयार-
नीमच एसोसिएशन के सदस्य ज़ुल्फ़िकार ने बताया कि 17 अक्टूबर को आयोजित राष्ट्रीय ज़ूम मीटिंग में आंदोलन की रूपरेखा तय की गई थी।
योजना के अनुसार
24 अक्टूबर से वितरक काली पट्टी बांधकर कार्य करते हुए जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपेंगे।
29 अक्टूबर को प्रदेश मुख्यालयों पर मशाल और मोमबत्ती जुलूस निकाले जाएंगे।
6 नवंबर को वितरक तेल कंपनियों में पैसा जमा नहीं करेंगे, न ही गैस इंडेंट डालेंगे।
यदि इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
वितरक मानसिक रूप से हो रहे परेशान-
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि तेल कंपनियों के कुछ अधिकारियों के अनैतिक दबाव के कारण कई वितरक मानसिक रूप से परेशान हैं, जिनमें से कुछ ने आत्महत्या जैसे कदम भी उठाए हैं। एसोसिएशन ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि बढ़ती महंगाई और वास्तविक लागत को ध्यान में रखते हुए होम डिलीवरी और प्रशासनिक शुल्क में तत्काल 75 की वृद्धि की जाए, ताकि वितरक गरिमा के साथ अपना व्यवसाय जारी रख सकें।