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December 29, 2025, 10:26 am
KHABAR : हवन पूजन, महाआरती के साथ कथा की हुई पूर्णाहुति, पं. रमाकांत गोस्वामी ने कहा- सुदामा ब्रह्म को जानने वाले ब्रम्हज्ञानी थे, ग्रहस्थ में रहते हुए भी विरक्त थे सुदामा, पढ़े मुकेश पार्टनर की खबर

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नीमच। किसी भी व्यक्ति को किसी का अधिकार नहीं लेना चाहिए। अगर कोई धर्म के नाम का दान लेता है तो ऐसे व्यक्ति को दरिद्रता भोगना पड़ती हैं। बेटा के लिए अपने भाई का अधिकार कभी छिनकर इक्ट्ठा मत करना नहीं तो नर्क में भी जगह नहीं मिलेगी। भगवान श्री कृष्ण ने परण,वरण,शरण और हरण चार प्रकार से 16 हजार 108 विवाह किए थे,सभी रानीयों के साथ परब्रह्म परमात्मा एक समान रहते थे। गुरु के बिना भव सागर नहीं जा सकते,बिना गुरु के मानव के जीवन में गौर अंधेरा हैं।रावण बडा ज्ञानी और विध्दवान था पर गुरु नहीं था।गुरु करना जानकर पानी पीना छानकर।अगर कोई गुरु नहीं मिले तो हनुमानजी को गुरु बना लेना।सुदामा ब्रह्मज्ञानी थे,ब्रह्म को जानने वाले थे सुदामा,ग्रहस्थ में रहते हुए भी विरक्त थे,सुदामा कोई साधारण नहीं थे।सुदामा जानते थे की गुरु माता द्वारा दिए गए ये चने सापित हैं,अपने मित्र श्रीकृष्ण को दरिद्रता से बचाने के लिए खुद ने श्रापित चने खा कर दरिद्रता को अपने उपर ले ली।उक्त वाणी कथा मर्मज्ञ पं. रमाकांत गोस्वामी द्वारा चौकन्ना बालाजी के समीप में स्थित कमल अग्रसेन भवन परिसर में   आयोजित  श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन के दौरान अंतिम दिन  अपने मुखारविंद से प्रवाहित करते हुए कही।पं.  गोस्वामी ने कथा का रसास्वादन करवाते हुए कहा कि कोई धन से दुःखी तो कोई तन से तो कोई संतान से तो कोई काहे से थोड़ा थोड़ा सब दुखी हैं, सुखी तो भगवान का भक्त है। स्वयं की अपनी पुरुषार्थ पर कमाई की गयीं संपत्ति की कद्र होती हैं,छल कपट  से सोने की लंका हथीयाई ,सौ-सौ पुत्र होते हुए भी अंत में कुछ नहीं स्वयं का व परिवार का अस्तित्व भी मिट गया।

व्यास पीठ पर पौथी पूजन मुख्य यजमान  सिंहल परिवार-
द्वारा कथा मर्मज्ञ पं. रमाकांत गोस्वामी का दुपट्टा ओढ़ाकर  कर  सम्मान किया ,साथ ही व्यास मंच पर अखण्ड मूल पाठ का जाप कर रहे पण्डित  विधि कारक अत्याधुनिक वाद्य यंत्र सुमधुर स्वर लहरियों की छटा बिखेरी ।कथा पंडाल में प्रारंभ में विधि विधान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन किया गया। कथाआयोजक के  द्वारा कथा मर्मज्ञ पंडित रमाकांत गोस्वामी एवं उनके कलाकारों की टीम के सदस्यों  का शाल श्री फल भेंटकर सम्मानित किया गया। श्रीमद भागवत कथा प्रवचन के दौरान बीच बीच मे  वाध्ययंत्र की मधुर स्वर लहरियों पर पं. जी द्वारा मिठे मिठे भजन  बंता मेरे यार सुदामा रे भाई बड़े दिनों में आया... ऐसों कोई नहीं रे अणी हिरा की पोटली सद गुरु माग्यो..,चले श्याम से मिलने सुदामा....,कैसे आऊरे कन्हैया थारी  द्वावारिका नगरी बडी  दूर नगरी...,अरे द्ववारपालो जाके  कन्हैया से  कह दो द्वार पे सुदामा आया है..., हर बात को तुम् भूलों बलै माँ -बाप को मत भूलना..आदि भजनों पर श्रद्धालु पूरी भक्ति भावना उडेलते हुए पूरे मनोभाव से नृत्य किया।श्रद्धालुओं ने भी  प्रतिदिन ज्ञान गंगा में डुबकीयां लगाई।कथा प्रवचन के अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरण के साथ ही साप्ताहिक कथा की  पूर्णाहुति के साथ कथा का  विश्राम हुआ।

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