नीमच। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) की जिला शाखा नीमच ने प्रदेश के लाखों आउटसोर्स, संविदा, ठेका एवं अन्य अस्थायी श्रेणी के कर्मचारियों के भविष्य को लेकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। संगठन ने सरकार के उस प्रस्तावित निर्णय पर कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसमें मार्च 2027 तक अस्थायी श्रेणियों को समाप्त कर फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट लागू करने की बात कही गई है।
इस अवसर पर सीटू के प्रदेश सचिव शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में हजारों कर्मचारी 15 से 20 वर्षों से अधिक समय से संविदा एवं आउटसोर्स व्यवस्था के अंतर्गत सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों को स्थायित्व प्रदान करने के बजाय अनिश्चित रोजगार व्यवस्था में धकेलना न केवल अन्यायपूर्ण, बल्कि अमानवीय भी है। उन्होंने भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान वेतनमान एवं स्थायी किए जाने का वादा किया गया था, जिससे अब सरकार पीछे हटती नजर आ रही है।
ज्ञापन में सीटू ने मांग की कि मध्यप्रदेश में चारों श्रम संहिताएं लागू न की जाएं, सभी अस्थायी श्रेणी के कर्मचारियों को स्थायी कर पूर्ण वेतनमान एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए। इसके साथ ही सरकारी भर्तियों में संविदा एवं आउटसोर्स कर्मियों को अनुभव के आधार पर बोनस अंक देने, न्यूनतम वेतन 30,000 प्रतिमाह निर्धारित करने, फिक्स्ड टर्म रोजगार नीति को समाप्त करने तथा नीमच नगर पालिका के संविदा कर्मचारियों से संबंधित लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने की मांग रखी गई।
सीटू ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अस्थायी कर्मचारियों के हितों की अनदेखी जारी रखी, तो संगठन प्रदेशव्यापी जन आंदोलन छेड़ने से पीछे नहीं हटेगा।