प्रतापगढ़। जिले की पीपलखूंट तहसील स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) घंटाली में नवजात शिशु की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित पिता दशरथ निनामा ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज जब्त करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित के अनुसार 25 अगस्त 2025 को सुबह करीब 6:30 बजे उनकी पत्नी रमिला कुमारी ने PHC घंटाली में सामान्य प्रसव के दौरान नवजात शिशु को जन्म दिया। जन्म के बाद बच्चा पूरे दिन और रात स्वस्थ रहा। लेकिन 26 अगस्त की सुबह करीब 8:30 बजे बच्चे ने दूध पीना बंद कर दिया और उल्टियां होने लगीं।
परिजनों का आरोप है कि बच्चे को गोद में लेकर डॉक्टर और नर्स को दिखाया गया, उस समय दोनों एक ही कमरे में मौजूद थे, लेकिन नवजात की आवश्यक चिकित्सकीय जांच नहीं की गई। सेप्सिस टेस्ट सहित जरूरी परीक्षण नहीं कराए गए और न ही समय रहते उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया। केवल यह कहा गया कि बच्चे को उसकी मां के पास ले जाकर रख दो। इसी लापरवाही के चलते 26 अगस्त को दोपहर करीब 1:30 बजे नवजात की मौत हो गई।
पीड़ित द्वारा जिला कलेक्टर कार्यालय में दो बार और उपखंड अधिकारी कार्यालय पीपलखूंट में एक बार शिकायत प्रस्तुत की गई। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा केवल एक जांच समिति गठित की गई, जिसने 30 अक्टूबर 2025 को PHC घंटाली का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की, जिसे 11 नवंबर 2025 को कलेक्टर को अग्रेषित किया गया। पीड़ित का आरोप है कि रिपोर्ट तथ्यहीन, भ्रामक और वास्तविक घटनाक्रम से विपरीत है।
रिपोर्ट में पुरुष परिजन की उपस्थिति के बावजूद “पुरुष अटेंडेंट उपलब्ध नहीं” होना दर्शाया गया, जबकि सीसीटीवी फुटेज से सच्चाई स्पष्ट हो सकती है। साथ ही बच्चे को डॉक्टर-नर्स को दिखाए जाने की बात को भी छुपाया गया। पीड़ित परिवार का बयान लिए बिना एकपक्षीय निष्कर्ष दिए गए, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ित ने मांग की है कि 25 और 26 अगस्त 2025 के PHC घंटाली में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तुरंत सुरक्षित कर जांच की जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि बच्चे को किसने और कब डॉक्टर-नर्स को दिखाया, उस समय स्टाफ मौके पर मौजूद था या नहीं, जांच-उपचार किया गया या नहीं।
27 अगस्त 2025 को CHC पीपलखूंट में पोस्टमार्टम किया गया, जिसमें उपस्थित पांचों पंचों—मुकेश, भैरूलाल, विकास, मोहन और कालु—ने एक राय होकर बताया कि नवजात की मृत्यु इलाज न मिलने के कारण हुई। उसी दिन थाना घंटाली में FIR क्रमांक 19/2025 धारा 194 बीएनएसएस के तहत मामला दर्ज किया गया, लेकिन चार माह बीत जाने के बावजूद केस डायरी और जांच रिपोर्ट अब तक उपखंड अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत नहीं की गई है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि उनके और परिजनों के बयान भी आज तक दर्ज नहीं किए गए, जो जांच प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि है। परिवार ने गलत रिपोर्ट देने वालों पर कड़ी कार्रवाई, निष्पक्ष पुनः जांच और मुख्यमंत्री सहायता कोष/पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की मांग की है।
पीड़ित पिता दशरथ निनामा ने कहा, “हमारा बच्चा सिस्टम की लापरवाही से मरा और अब सच्चाई भी दबाई जा रही है।”