चित्तौड़गढ़। मानव व्यवहार और सोच को समझने में नेत्र संकेत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आँखों की गति से व्यक्ति की सोच—दृश्य, श्रव्य एवं अनुभूतिपरक की प्रकृति का संकेत मिलता है। साथ ही यह भी एक प्रमाणित मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि जब किसी व्यक्ति को यह अनुभूति होती है कि उसे देखा जा रहा है या उसके समक्ष आँखों जैसी आकृतियाँ होती हैं, तो उसके व्यवहार में स्वाभाविक परिवर्तन आने लगता है।
इन्हीं वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक तथ्यों को सरल, रोचक और व्यवहारिक स्वरूप प्रदान करते हुए चित्तौड़गढ़ के युवा सीए मुदित भण्डारी पुत्र सीए सुनील भण्डारी ने एक अभिनव नेत्र संकेत आधारित प्लेइंग कार्ड का नवाचार किया है। इस नवाचार को इसकी मौलिकता एवं उपयोगिता के लिए भारत सरकार द्वारा विधिवत कॉपीराइट प्रदान किया गया है,जो इसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाता है। यह प्लेइंग कार्ड विशेष रूप से बच्चों के लिए उपयोगी है, जिसके माध्यम से वे खेल-खेल में अपने आईक्यू का आकलन कर सकते हैं, एकाग्रता बढ़ा सकते हैं तथा नेत्र संकेतों से जुड़े व्यवहारिक प्रभावों को समझ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह नवाचार बच्चों के मानसिक विकास, निर्णय क्षमता और विश्लेषणात्मक सोच को सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध हो सकता है। इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए समाज के प्रबुद्धजनों ने इसे शिक्षा, मनोविज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक पहल बताया है, जो समाज के लिए दीर्घकालीन लाभकारी सिद्ध होगी। इस नवाचार को कॉपीराइट मिलने से इसका विस्तार ओर मौलिकता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।