चित्तौड़गढ़। भारत विकास परिषद के आत्मनिर्भर भारत प्रकल्प के अंतर्गत संचालित सिलाई एवं कौशल प्रशिक्षण केंद्र पर पिछले वर्ष तीन माह का प्रशिक्षण प्राप्त कर सिलाई में दक्ष हुई 25 बालिकाओं एवं महिलाओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
केंद्र व्यवस्थापिका एवं शाखा संरक्षिका शशी सनाढ्य ने जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण केंद्र वर्ष 2018 से निरंतर संचालित है तथा अब तक 2023 बालिकाएँ व महिलाएँ प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं। तीन माह का प्रशिक्षण पूर्ण कर सिलाई में दक्ष होने वाली प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाते हैं।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय गतिविधि संयोजक कमल जैन, प्रांतीय उपाध्यक्ष बालकिशन धूत एवं प्रांतीय सह संगठन मंत्री नवीन वर्डिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर राजस्थान दक्षिण प्रांत के प्रांतीय अध्यक्ष मयंक दोसी एवं उनके भाई गोपाल दोसी द्वारा अपने स्वर्गीय पिता नारायणलाल दोसी की स्मृति में आत्मनिर्भर भारत प्रकल्प के तहत प्रदान की गई दो सिलाई मशीनें चित्तौड़गढ़ केंद्र को सौंपी गईं। मशीनें केंद्र व्यवस्थापिका शशी सनाढ्य, अलका जैन, आशा वर्डिया एवं संस्कृति सप्ताह प्रभारी अर्चना मोदानी को प्रदान की गईं।
इस अवसर पर कमल जैन ने संबोधित करते हुए कहा कि मयंक दोसी द्वारा प्रदेश के विभिन्न केंद्रों को 11 सिलाई मशीनें देने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि माता-पिता की स्मृति में दान करना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना सच्ची सेवा है। दान और सेवा हमारा धर्म भी है और दायित्व भी। जिनके पास नहीं है, उन्हें देना ही समाज सेवा का मूल उद्देश्य है, जिसमें भारत विकास परिषद अग्रणी भूमिका निभा रही है।
कार्यक्रम में परिषद के संस्थापक अध्यक्ष स्व. डॉ. महेश सनाढ्य को भी स्मरण किया गया। उनके द्वारा सिलाई केंद्र हेतु अपना मकान उपलब्ध कराना तथा कोरोना काल में 11 हजार से अधिक मास्क निःशुल्क वितरित करना सभी के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया।
कार्यक्रम में शाखा सचिव बृजेश मोदानी, वित्त सचिव राजेश खंडेलवाल, सेवा संयोजक राजेश पगारिया, संस्कार संयोजक मनोहर मुंदड़ा, सीपी सुखवाल, अंजु पगारिया, स्नेहलता मुंदड़ा तथा प्रशिक्षिका संगीता जैन ने अतिथियों एवं प्रशिक्षणार्थियों का स्वागत किया। टीना, प्रियंका सहित कई बालिकाओं एवं महिलाओं ने केंद्र पर प्राप्त अनुभव साझा किए। अंत में राकेश शर्मा ने आभार व्यक्त किया।