मंदसौर। जीवागंज क्षेत्र में गोवंश के अवशेष मिलने की घटना ने शनिवार को पूरे मंदसौर को आंदोलित कर दिया। आक्रोश, आस्था और विरोध के अनोखे संगम के बीच शहर में स्वयं से बाजार बंद देखने को मिला। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के आह्वान पर दोपहर 2 बजे तक बाजार पूरी तरह बंद रहे। इस आंदोलन की सबसे खास और भावनात्मक बात यह रही कि प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के दफ्तरों का रुख करने के बजाय नेहरू बस स्टैंड स्थित बालाजी मंदिर पहुंचकर भगवान के चरणों में ज्ञापन अर्पित किया और प्रशासन को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।
आस्था के दरबार में लगाई गुहार-
बंद के पश्चात विहिप और बजरंग दल सहित सर्व हिंदू समाज के कार्यकर्ता बालाजी मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश दिया कि जब बार-बार ज्ञापन और मांगों के बावजूद न्याय नहीं मिलता, तब आस्था के दरबार में गुहार लगानी पड़ती है। कार्यकर्ताओं ने भगवान से प्रार्थना की कि वे प्रशासन को विवेक और साहस प्रदान करें, ताकि दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो सके।
प्रशासन को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना-
इस अवसर पर हेमंत मूलचंदानी ने कहा कि हम बार-बार प्रशासन को आवेदन देकर थक चुके हैं। शहर में जिस प्रकार की घटनाएं हो रही हैं, उन पर यदि सख्ती से कार्रवाई हो, इसी कामना से हम बालाजी की शरण में आए हैं। हमें उम्मीद है कि भगवान प्रशासन को सद्बुद्धि देंगे।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन, रैली निकालकर बंद कराया बाजार-
सर्व हिंदू समाज, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल द्वारा शनिवार दोपहर 2 बजे तक मंदसौर बंद का आह्वान किया गया था। सुबह से ही कार्यकर्ताओं ने शहर के प्रमुख मार्गों पर रैली निकाली। जिन व्यापारिक प्रतिष्ठानों के शटर खुले मिले, वहां पहुंचकर विनम्रतापूर्वक दुकानदारों से बंद का समर्थन करने का अनुरोध किया गया, जिसे व्यापारियों ने सहयोगपूर्वक स्वीकार किया। दोपहर 2 बजे तक पूरा शहर शांतिपूर्ण ढंग से बंद रहा। कहीं भी किसी प्रकार की झड़प, विवाद या अप्रिय स्थिति नहीं बनी।
गुरुवार को मिले थे गोवंश के अवशेष, तभी से था आक्रोश-
उल्लेखनीय है कि गुरुवार दोपहर जीवागंज क्षेत्र में गोवंश के अवशेष मिलने के बाद हिंदू संगठनों और नागरिकों में गहरा आक्रोश फैल गया था। घटना के विरोध में संगठनों ने अवशेष हाथों में लेकर घंटाघर तक रैली निकाली थी और प्रशासन को 24 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी का अल्टीमेटम दिया था। निर्धारित समय सीमा में ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराज संगठनों ने शनिवार को शहर बंद का ऐलान किया, जो पूरी तरह शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी रहा।
मंदिर में सौंपा प्रतीकात्मक ज्ञापन-
मंदसौर में हुए इस बंद और मंदिर में सौंपे गए प्रतीकात्मक ज्ञापन ने प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश दिया है कि जनभावनाओं से जुड़े मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई अब जन अपेक्षा बन चुकी है। हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारियों व सदस्यों ने भी भगवान से प्रशासन के उदासीन अधिकारियों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की है।