मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में महिला एवं बाल विकास विभाग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। विभागीय बजट में 26 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए इसे केवल वित्तीय प्रावधान नहीं बल्कि प्रदेश की आधी आबादी के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का संकल्प बताया गया है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने इसे समावेशी विकास का रोडमैप बताते हुए कहा कि यह बजट महिलाओं को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और बच्चों को पोषण व संरक्षण देने की दिशा में मील का पत्थर होगा। सरकार का फोकस नारी शक्ति को मुख्यधारा में लाने और आदिवासी अंचलों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर है।
योजनाओं में बड़ा वित्तीय प्रावधान
महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी प्रमुख योजनाओं के लिए बजट में भारी राशि आवंटित की गई है:
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना : ₹23,883 करोड़ – महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ावा
आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 : ₹3,863 करोड़ – सक्षम आंगनवाड़ी सेवाओं के लिए
लाड़ली लक्ष्मी योजना : ₹1,801 करोड़ – बेटियों की शिक्षा व सुरक्षा
पोषण आहार : ₹1,150 करोड़ – कुपोषण उन्मूलन
पोषण अभियान : ₹250 करोड़
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (मिशन शक्ति) : ₹387 करोड़ – गर्भवती व धात्री माताओं के लिए
बुनियादी ढांचे और बाल संरक्षण पर फोकस
सरकार ने जमीनी स्तर पर ढांचा मजबूत करने के लिए भी प्रावधान किए हैं:
आंगनवाड़ी भवन निर्माण हेतु ₹337 करोड़
मिशन वात्सल्य व नॉन-इंस्टीट्यूशनल केयर (स्पॉन्सरशिप/फॉस्टर केयर) के लिए कुल ₹283 करोड़
अनाथ व जरूरतमंद बच्चों को पारिवारिक वातावरण में देखभाल देने पर जोर
2027 तक लाड़ली बहना राशि बढ़ाने का संकेत
सरकार ने 2027 तक लाड़ली बहना योजना की राशि बढ़ाने के अपने वादे को दोहराया है। मुख्यमंत्री ने इसे “जनता का बजट” बताते हुए कहा कि कृषि, महिला सुरक्षा, पोषण और सामाजिक सुरक्षा को केंद्र में रखकर विकास का रोडमैप तैयार किया गया है।
निष्कर्ष
महिला सशक्तिकरण, पोषण उन्मूलन और बाल संरक्षण पर केंद्रित यह बजट सामाजिक क्षेत्र में बड़े निवेश का संकेत देता है। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ही यह तय होगा कि यह प्रावधान जमीनी स्तर पर महिलाओं और बच्चों के जीवन में कितना बदलाव ला पाता है।