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May 26, 2026, 5:57 pm
KHABAR : एमपीपीएससी का अजीब फैसला, डीएवीवी से पास छात्र को इंटरव्यू से किया बाहर, हिंदी साहित्य की जगह फंक्शनल हिंदी लिखा होना बनी वजह, कोर्ट की शरण में पीड़ित, पढे़ खबर

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इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की हिंदी अध्ययनशाला से एम ए पास कर एमपीपीएससी की परीक्षा पास करने वाले युवक को डिग्री में मात्र हिंदी पास आउट की जगह एम ए फंक्शनल हिंदी एंड लिटरेचर लिखे होने के चलते इंटरव्यू से बाहर का दिया गया। यही नहीं ऐसे कई और छात्र अब इसी समस्या से जूझ रहे हैं जिन्हें भी हिंदी फंक्शनल एंड लिटरेचर लिखे होने के चलते अब मेंस एक्जाम से बाहर किया जा सकता है।


एम ए की डिग्री अमान्य कर दी
दरअसल इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की खंडवा रोड स्थित अध्ययनशाला से ऋतिक नामक छात्र ने एम ए हिंदी पास की जिसके बाद उन्होंने एमपीपीएससी द्वारा निकाली गई सहायक हिंदी प्राध्यापक भर्ती परिक्षा के लिए आवेदन किया और प्री एग्जाम पास कर मेंस भी क्लियर की और उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया लेकिन जब वे इंटव्यू देने पहुंचे तो उनके दस्तावेजों की जांच के दौरान उनकी हिंदी विषय की एम ए की डिग्री सिर्फ इसलिए अमान्य कर दी है क्योंकि उनकी डिग्री में एम ए हिंदी साहित्य की जगह एम ए फंक्शनल हिंदी एंड लिटरेचर लिखा गया था।


पीड़ित के अलावा अन्य छात्र भी घबराए हुए
इस बारे में एमपीपीएससी के अधिकारियों ने इस डिग्री को अपनी वेकेन्सी में उल्लेखित डिग्री नहीं माना और उसे मेंस के इंटरव्यू से बाहर कर दिया गया। जिसके बाद उन्होंने विश्वविद्यालय से संपर्क किया। विश्वविद्यालय ने एमपीपीएससी यानि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को पत्र जारी कर डिग्री को योग्य बताया है। इसके बाद भी एमपीपीएससी ने लेटर को भी अमान्य कर दिया है। अब ऋतिक सहित हिंदी अध्ययनशाला के अन्य छात्र भी घबराए हुए हैं कि आखिर दोनों ही विभागों के बीच चल रहे विवाद में उनका भविष्य खराब हो रहा है।


पीड़ित छात्र ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
मामले में पीड़ित छात्र रितिक गुप्ता ने अब इंदौर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने वकील अनिरुद्ध पटवा के माध्यम से इस पूरे मामले में याचिका दायर की जिस पर सुनवाई होना बाकी है। वकील का कहना है कि इस मामले में मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा आयोग को निर्णय लेना है यदि उन्होंने निर्णय नहीं लिया तो छात्रों का भविष्य खराब हो सकता है।


आयोग से ही सवाल किया जाना चाहिए
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुल सचिव प्रज्वल खरे ने मामले में पूरी जवाबदारी उच्च शिक्षा विभाग और एमपीपीएससी प्रशासन पर डाल रहे हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय द्वारा दी जा रही हिंदी की डिग्री मात्र डिग्री हिंदी साहित्य से कहीं और आगे बढ़कर हिंदी लिटरेचर और फंक्शनल हिंदी पर बेस्ड है जो सभी जगह मान्य है। हमने एमपीपीएससी प्रशासन को पत्र भी जारी किया है लेकिन आयोग उसे क्यों मान्य नहीं कर रहा है यह आयोग से ही सवाल किया जाना चाहिए।

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