नीमच। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कृति संस्था द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम रविवार को संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पंजाब केसरी (डिजिटल) मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के संपादक हेमंत चतुर्वेदी ने हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की यात्रा, उसकी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
हेमंत चतुर्वेदी ने कहा कि हिंदी का प्रथम समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ लगभग 200 वर्ष पूर्व प्रकाशित हुआ था, लेकिन जनसमर्थन और संसाधनों के अभाव में उसका जीवनकाल बहुत कम रहा। वर्ष 1857 की क्रांति के बाद देश में अनेक समाचार पत्र प्रकाशित होने लगे, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और धार प्रदान की। उस दौर में पत्रकारिता का उद्देश्य अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनमत तैयार करना था और उसने इस दायित्व का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियां आईं। धीरे-धीरे मीडिया और समाचार पत्रों पर उद्योगपतियों एवं प्रभावशाली वर्ग का नियंत्रण बढ़ा, जिससे स्वतंत्र पत्रकारिता प्रभावित हुई। वर्ष 1990 के दशक में बाजारवाद और वैचारिक प्रभावों ने मीडिया की दिशा को बदल दिया। आज पत्रकारिता को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपना सशक्त राजस्व मॉडल विकसित करना आवश्यक है, ताकि वह किसी दबाव या समझौते के बिना कार्य कर सके।
चतुर्वेदी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज के केवल दो प्रतिशत लोगों की खबरें 98 प्रतिशत लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं, जबकि आमजन से जुड़े मुद्दों को पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा। उन्होंने जनसहयोग आधारित पत्रकारिता मॉडल को भविष्य के लिए बेहतर विकल्प बताते हुए कहा कि नीमच जैसे शहरों में समाज के सहयोग से स्वतंत्र समाचार पत्रों का सफल संचालन किया जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि धर्मेन्द्र शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनहित के मुद्दों को उठाना और समाज को सही दिशा देना है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को निष्पक्षता और निर्भीकता बनाए रखते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संपादकीय किसी भी समाचार पत्र का आईना होता है, लेकिन आज पाठकों की रुचि उसमें कम होती जा रही है।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। अतिथियों का स्वागत कृति संस्था के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी, भरत जाजू,आशा साम्भर एवं कमलेश जायसवाल ने किया। स्वागत उद्बोधन में ओमप्रकाश चौधरी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का 200 वर्षों का सफर गौरवशाली रहा है। उदन्त मार्तण्ड से शुरू हुई यह यात्रा आज डिजिटल युग तक पहुंच चुकी है और लगातार नए आयाम स्थापित कर रही है।
संवाद कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकारों, साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों ने पत्रकारिता के मूल्यों, नैतिक जिम्मेदारियों, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य को लेकर अपने प्रश्न एवं विचार रखे। मुख्य वक्ता हेमंत चतुर्वेदी ने सभी जिज्ञासाओं का विस्तार से उत्तर देते हुए पत्रकारिता के सरोकारों पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यक्रम का संचालन सत्येन्द्र सिंह राठौर ने किया तथा डॉ. अक्षय पुरोहित ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सकल ब्राह्मण कल्याण समिति के अध्यक्ष दिलीप शर्मा एवं समिति सदस्यों द्वारा हेमंत चतुर्वेदी का शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में राजेश जायसवाल, डॉ. पृथ्वी सिंह वर्मा, महेंद्र त्रिवेदी, सत्येन्द्र सक्सेना, प्रकाश भट्ट, योगेश पाटीदार, विनोद शर्मा, नरेन्द्र पोरवाल, डॉ. माधुरी चौरसिया, बाबूलाल गौड़, ओपी सिंघल सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।