सतना। मध्य प्रदेश के सतना नगर निगम के वार्ड क्रमांक 17 की महिला पार्षद ऊषा गंगा कुशवाहा ने अनोखे अंदाज में अपनी बात प्रशासन के समक्ष रखी। उन्होंने बताया कि मुक्तिधाम जाने वाले आम रास्ते से अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा। इसके लिए कई बार आवेदन दिया, जिसकी सांख्य नहीं बता सकती, इसलिए आवेदनों का वजन कर बता रही हूं।
उन्होंने बताया कि आवेदनों का वजन करीब 700 ग्राम तक पहुंच चुका है। इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। इस बात पर नाराजगी जताते हुए कलेक्टर को पत्र सौंपकर धरने पर बैठ गईं। पार्षद पति गंगा का कहना है कि पिछले चार वर्षों से वह लगातार आवेदन और निवेदन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
कलेक्टर को संबोधित पत्र में पार्षद ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के समीप स्थित मुक्तिधाम तक पहुंचने वाले मार्ग पर दो लोगों द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है। इसके कारण आम लोगों को मुक्तिधाम तक पहुंचने में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि 15 नवंबर 2025 को एक आदिवासी परिवार की महिला की मृत्यु होने पर मुक्तिधाम तक रास्ता नहीं होने के कारण बीच मोहल्ले में ही अंतिम संस्कार करना पड़ा था। इस घटना के बाद मामला सार्वजनिक रूप से उठाया गया और प्रशासन ने स्थल निरीक्षण भी कराया, लेकिन आगे कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
पार्षद का आरोप है कि अधिकारियों ने निरीक्षण तो किया, लेकिन अतिक्रमण हटाने की दिशा में कदम नहीं उठाए गए और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा दिए गए आवेदनों और प्रशासन के निर्देशों की केवल औपचारिकता निभाई गई है। पत्र में पार्षद ने स्पष्ट किया है कि उनका पत्र किसी प्रकार की धमकी नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि के रूप में जनता की समस्या को लेकर व्यक्त की गई पीड़ा है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जब जनता की जायज मांगों पर सुनवाई नहीं होती, तब धरना-प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है। उनका कहना है कि वह अपने निजी हित के लिए नहीं, बल्कि वार्डवासियों और मुक्तिधाम तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। पार्षद ने कलेक्टर से मांग की है कि मुक्तिधाम के आम रास्ते से शीघ्र अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए, अन्यथा उन्हें कलेक्ट्रेट के सामने धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।