चित्तौड़गढ़। जैन संत उपाध्याय प्रवर गौतम मुनि ने कहा कि समाज को पंथ, परंपरा और संप्रदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर परस्पर समन्वय, सद्भाव और प्रेम का वातावरण बनाना चाहिए।
श्रमण संघ के संत-साध्वियों की निश्रा में मीरानगर स्थानक में सामायिक एवं सामूहिक एकासन दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और धर्मलाभ प्राप्त किया।
युवाओं को आत्मचिंतन का संदेश
कार्यक्रम में आगमकार वैभव मुनि ने युवाओं से आह्वान किया कि वे धर्म के प्रति रुचि बढ़ाएं और प्रतिदिन कुछ समय आत्मचिंतन के लिए अवश्य निकालें। उन्होंने कहा कि आत्ममूल्यांकन से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
गुरुओं की जयंती और दीक्षा दिवस मनाया गया
इस अवसर पर मेवाड़ संघ शिरोमणि प्रवर्तक गुरुदेव अंबालाल जी म.सा. की 121वीं जयंती और राजस्थान परवर्तिनी गुरुनी यश कुंवर जी म.सा. का 89वां दीक्षा दिवस सामायिक एवं एकासन के रूप में मनाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 8 बजे नवकार मंत्र जाप और अंबेश चालीसा के साथ हुई। धर्मसभा में संतों ने संयम, त्याग और अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला।
धर्मसभा में विचार और प्रस्तुति
धर्मसभा में प्रतिभा मुनि ने प्रवर्तक गुरुदेव अंबालाल जी के जीवन और उनके संयमित व्यक्तित्व पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं साध्वी धैर्यप्रभा जी ने अवगुणों के त्याग का संकल्प लेने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में जैन दिवाकर महिला परिषद की ओर से स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। पूर्व मंत्री डॉ. रतनलाल मारू सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन पूर्व मंत्री पारसमल बाबेल ने किया, जबकि मीरानगर संघ अध्यक्ष सुशील अब्बानी और मंत्री निर्मल चंडालिया ने अतिथियों का स्वागत किया।