प्रतापगढ़। आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत संजीवनी सेवा संस्थान द्वारा किसानों एवं महिला स्वयंसेवकों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से लगभग 50 हजार रुपये मूल्य के सहजन (मोरिंगा) के बीज निःशुल्क वितरित किए गए। कार्यक्रम के तहत औषधीय एवं लाभकारी फसल सहजन की खेती को बढ़ावा देने के लिए स्वयंसेवकों को बीज उपलब्ध कराए गए।
बीज वितरण से पूर्व करीब तीन घंटे का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जैविक खेती, बेहतर उत्पादन तकनीक एवं मल्टी क्रॉप खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान महिला स्वयंसेवकों को आधुनिक एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों से भी अवगत कराया गया। कार्यक्रम में प्रत्येक स्वयंसेवक को 100-100 बीजों के पैकेट निःशुल्क प्रदान किए गए।
कृषि विशेषज्ञ चौधरी अमर सिंह ने बताया कि लगातार एक ही प्रकार की फसल लेने से भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है, जिससे उत्पादन में कमी आती है। उन्होंने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने तथा सहजन जैसी औषधीय एवं आर्थिक रूप से लाभकारी फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया।
संजीवनी सेवा संस्थान की ऑफिस इंचार्ज अनसूया मीणा ने कहा कि सहजन (मोरिंगा) एक औषधीय एवं पोषणयुक्त फसल है, जिसकी खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती है। इसके नियमित उपयोग से स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते हैं।
कार्यक्रम में फील्ड ऑफिसर ललिता पाटीदार एवं धापू पाटीदार ने भी विचार व्यक्त करते हुए स्वयंसेवकों से अभियान की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
संस्थान द्वारा संचालित आदि कर्मयोगी अभियान का उद्देश्य किसानों, महिलाओं एवं ग्रामीण युवाओं को जैविक खेती, औषधीय फसलों और स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।