चित्तौड़गढ़। चेक अनादरण के एक मामले में चित्तौड़गढ़ न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त रतनलाल, निवासी ग्राम सिरोड़ी, को दोषसिद्ध किया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-02 चित्तौड़गढ़ की पीठासीन अधिकारी अंकिता चंद्रावत ने 4 अगस्त 2026 को निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त को एक वर्ष के साधारण कारावास और परिवादी को 80 हजार रुपए प्रतिकर राशि देने की सजा सुनाई।
प्रकरण के अनुसार परिवादी नवीन कुमार नाहर, निवासी चित्तौड़गढ़, ने अधिवक्ताओं रत्नेश कुमार जैन (बोहरा), विशाल सिंह भाटी और मोनिका जैन के माध्यम से न्यायालय में परिवाद पेश किया था। परिवाद में बताया गया कि अभियुक्त रतनलाल ने व्यवसाय और घरेलू खर्च सहित अन्य आवश्यकताओं के लिए परिवादी से 50 हजार रुपए उधार लिए थे।
उधार राशि की अदायगी के लिए अभियुक्त ने चेक नंबर 623961, दिनांक 9 अक्टूबर 2016, राशि 50 हजार रुपए का इलाहाबाद बैंक शाखा चित्तौड़गढ़ का चेक दिया था। परिवादी द्वारा चेक बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित हो गया।
इसके बाद परिवादी की ओर से अभियुक्त को कानूनी नोटिस भेजकर चेक की राशि का भुगतान करने के लिए कहा गया, लेकिन निर्धारित समय में राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद परिवादी ने न्यायालय की शरण लेते हुए अभियुक्त के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कराई।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर रतनलाल को चेक अनादरण के अपराध का दोषी मानते हुए दोषसिद्ध किया। न्यायालय ने उसे एक वर्ष के साधारण कारावास से दंडित करने के साथ ही परिवादी को 80 हजार रुपए प्रतिकर राशि दिलाए जाने का आदेश दिया।
मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता रत्नेश कुमार जैन (बोहरा), विशाल सिंह भाटी और मोनिका जैन ने पैरवी की।