मंदसौर। रक्षाबंधन के अवसर पर मंदसौर की अर्पणा जैन पिछले 19 वर्षों से भगवान पशुपतिनाथ को राखी बांधने की अनूठी परंपरा निभा रही हैं। इस वर्ष उन्होंने करीब 10 दिन की मेहनत से भगवान पशुपतिनाथ के लिए 12 फीट लंबी विशेष राखी तैयार की है। राखी में भगवान शिव के चार अलग-अलग स्वरूपों को आकर्षक रूप में दर्शाया गया है।
मूल रूप से जयपुर निवासी अर्पणा जैन की शादी 19 वर्ष पहले मंदसौर में हुई थी। विवाह के बाद उन्होंने भगवान पशुपतिनाथ को अपना भाई मानकर हर वर्ष रक्षाबंधन पर राखी बांधने का संकल्प लिया।
राखी में शिव के चार स्वरूपों का संदेश-
अर्पणा जैन द्वारा तैयार राखी में भगवान शिव के अर्धनारीश्वर, रौद्र रूप, शिव परिवार और गंगाधर स्वरूप को दर्शाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक स्वरूप के माध्यम से समाज और मानव जीवन से जुड़ा एक विशेष संदेश देने का प्रयास किया गया है।
पहले स्वरूप में अर्धनारीश्वर शिव को दर्शाते हुए समाज में महिलाओं के प्रति भेदभाव और द्वेष समाप्त होने की कामना की गई है। दूसरे स्वरूप में भगवान शिव के रौद्र रूप के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं और विपरीत परिस्थितियों से सभी की रक्षा की प्रार्थना की गई है।
तीसरे स्वरूप में शिव परिवार को दर्शाया गया है, जबकि चौथे स्वरूप में भगवान शिव के गंगाधर रूप को प्रदर्शित किया गया है।
मंदिर के लिए बनाए विशेष बंदनवार-
अर्पणा ने भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भगृह के मुख्य द्वार के लिए दो विशेष बंदनवार भी तैयार किए हैं। इनमें एक पर ‘श्री पशुपतिनाथ नमः’ और दूसरे पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखा गया है।
बचपन से शिव को मानती हैं भाई-
अर्पणा जैन ने बताया कि उनका कोई सगा भाई नहीं है। जयपुर स्थित उनके घर के पास एक शिव मंदिर था, जहां वे बचपन से भगवान शिव को अपना भाई मानकर राखी बांधती थीं। विवाह के बाद मंदसौर आने पर भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन किए तो उन्हें भगवान से भाई जैसा अपनापन और सुकून महसूस हुआ। इसके बाद उन्होंने भगवान पशुपतिनाथ को ही अपना भाई मानकर हर वर्ष राखी बांधने की परंपरा शुरू की।
उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर वे कभी अपनी मां के घर नहीं गईं। उन्हें पूरे वर्ष इस पर्व का इंतजार रहता है और त्योहार से कुछ दिन पहले ही भगवान पशुपतिनाथ के लिए विशेष राखी तैयार करने में जुट जाती हैं।
अर्पणा ने कहा कि उनकी भगवान पशुपतिनाथ से प्रार्थना है कि वे मंदसौर सहित पूरे देशवासियों की रक्षा करें और सभी के जीवन में सुख-शांति बनाए रखें।