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August 29, 2026, 10:33 am
KHABAR : रक्षाबंधन पर अनोखी मिसाल- 12 साल से बहन-बेटियों के बस किराए का खर्च उठा रहे सरपंच, बोले- गांव की हर बहन-बेटी परिवार का हिस्सा, उनकी सुविधा और सम्मान हमारी जिम्मेदारी, पढ़े बद्रीलाल गुर्जर की खबर 

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मनासा/भादवास। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का पर्व है। इसी भावना को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए ग्राम पंचायत भादवास के सरपंच बगदीराम गुर्जर पिछले करीब 12 वर्षों से गांव में आने वाली बहन-बेटियों के बस किराए का खर्च स्वयं वहन कर रहे हैं। उनकी यह पहल रक्षाबंधन के अवसर पर भाई-बहन के रिश्ते और सामाजिक जिम्मेदारी की अनूठी मिसाल बन गई है।

रक्षाबंधन पर गांव आने वाली बहनों और बेटियों को सुरक्षित एवं सम्मानपूर्वक उनके घर तक पहुंचाने के उद्देश्य से सरपंच की यह पहल वर्षों से जारी है। ग्रामीण भी इसे बहन-बेटियों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का उदाहरण मानते हैं।

राखी तक सीमित नहीं, रिश्तों के सम्मान की पहल-
आमतौर पर रक्षाबंधन पर भाई अपनी बहनों को राखी, मिठाई और उपहार देते हैं, लेकिन बगदीराम गुर्जर ने इस पर्व को सामाजिक सेवा से जोड़कर एक अलग संदेश दिया है। उनका कहना है कि गांव की हर बहन और बेटी परिवार का हिस्सा है। यदि उनके आने-जाने में आर्थिक परेशानी हो तो उसका समाधान करना भी भाई का कर्तव्य है।

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले करीब 12 वर्षों से रक्षाबंधन के दौरान यह व्यवस्था की जा रही है। इससे बहन-बेटियों को सुविधा मिलने के साथ गांव में भाईचारे, अपनत्व और सम्मान की भावना भी मजबूत हुई है।

बहनों को पौधे भेंट कर पर्यावरण का संदेश-
सरपंच की ओर से रक्षाबंधन के अवसर पर बहन-बेटियों को पौधे भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाता है। इस पहल के जरिए भाई-बहन के रिश्ते के साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने सरपंच की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि रक्षाबंधन को केवल राखी बांधने और उपहार देने तक सीमित न रखकर सामाजिक जिम्मेदारी एवं सेवा से जोड़ना निश्चित रूप से प्रेरणादायी है। सरपंच की यह पहल आने वाली पीढ़ी को भी रिश्तों के साथ समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दे रही है।

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