चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ स्थित सैनिक स्कूल में कनिष्ठ एवं वरिष्ठ वर्ग के लिए अंतर सदनीय चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन उत्साह और उमंग के साथ किया गया। प्रतियोगिता स्कूल के प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया एवं उप प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल के निर्देशन में आयोजित हुई। इसका उद्देश्य कैडेट्स की कलात्मक प्रतिभा को पहचानने और निखारने के साथ उनमें रचनात्मकता, कल्पनाशीलता, मौलिक अभिव्यक्ति एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करना था।
स्कूल के जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने बताया कि प्रतियोगिता में विभिन्न सदनों के चयनित कैडेट्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता दो वर्गों में आयोजित की गई। कनिष्ठ वर्ग में कक्षा 7 से 9 तथा वरिष्ठ वर्ग में कक्षा 10 एवं 11 के कैडेट्स शामिल हुए। प्रत्येक सदन से दोनों वर्गों में दो-दो कैडेट्स ने सहभागिता की।
कनिष्ठ वर्ग के लिए ‘राजस्थान संस्कृति एवं सौंदर्य’ तथा वरिष्ठ वर्ग के लिए ‘भारतीय लोक कला’ विषय निर्धारित किया गया था। कैडेट्स ने अपने चित्रों के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, लोक जीवन, पारंपरिक वेशभूषा, स्थापत्य एवं प्राकृतिक सौंदर्य के साथ भारतीय लोक कला की विविध परंपराओं को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया।
प्रतिभागियों की कलाकृतियों का मूल्यांकन विषय की प्रासंगिकता, रचनात्मकता, मौलिकता, कल्पनाशीलता, रंग संयोजन, छायांकन, स्वच्छता, प्रस्तुतीकरण एवं निर्धारित समय-सीमा के पालन सहित विभिन्न मानदंडों के आधार पर किया गया।
कला शिक्षिका कृतिबाला ने प्रतियोगिता के समग्र प्रभारी के रूप में आयोजन के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वरिष्ठ अध्यापिका पूजा सिंह सिसोदिया एवं जयंती सक्सेना ने निर्णायक की भूमिका निभाई।
वरिष्ठ वर्ग में नितिन कुमार प्रथम-
वरिष्ठ वर्ग में सांगा हाउस के कैडेट नितिन कुमार ने प्रथम, सांगा हाउस के सुमन कुमार ने द्वितीय तथा हमीर हाउस के यश रुन्डला ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
कनिष्ठ वर्ग में हसन रज्जा अव्वल-
कनिष्ठ वर्ग में हमीर हाउस के कैडेट हसन रज्जा प्रथम, लव हाउस के आदित्य चौधरी द्वितीय तथा सांगा हाउस के हितेन भामरे तृतीय स्थान पर रहे। विजेता कैडेट्स को मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल ने प्रशस्ति पत्र प्रदान किए।
प्रतियोगिता ने कैडेट्स को अपनी कलात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करने के साथ उनमें सांस्कृतिक चेतना, सौंदर्यबोध, आत्म-अभिव्यक्ति, धैर्य, एकाग्रता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा जैसे गुणों के विकास में भी योगदान दिया।