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September 13, 2026, 10:50 am
KHABAR : एक ही अधिकारी के एक ही मामले में 2 फैसले, तहसीलदार रहते जो फैसला दिया, एसडीएम बनते ही उसे पलट दिया, पढे़ खबर

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उज्जैन। बड़नगर एसडीएम धीरेंद्र पाराशर के एक फैसले ने प्रशासनिक अफसरों को मिले न्यायिक अधिकार का मजाक बना दिया। तहसीलदार रहते उन्होंने जमीन के मालिकाना हक को लेकर फैसला दिया, उसे एसडीएम बनने के बाद खुद ने ही विधि सम्मत न मानते हुए खारिज कर दिया। एक ही अधिकारी के एक ही प्रकरण में तहसीलदार और एसडीएम रहते पाराशर द्वारा दिए अलग-अलग निर्णय को लेकर बड़नगर निवासी गोपीलाल ने सामान्य प्रशासन विभाग भोपाल में शिकायत की है। इस पर अपर सचिव कार्मिक ने संभागायुक्त उज्जैन को पत्र भेजकर एसडीएम बड़नगर के निर्णयों की जांच के आदेश दिए।


जिला प्रशासन ने एडीएम प्रथम कौशिक से जांच कराते हुए टीम गठित की। एसडीएम बड़नगर पाराशर के 30 जनवरी 2026 को दिए जमीन पर हक के ​फैसले और उन्हीं के 12 साल पहले पारित किए गए निर्णय का एनालिसिस किया। दोनों ही फैसलों में विरोधाभास सामने आए। बाद में एसडीएम पाराशर के निर्णय को अपर आयुक्त रत्नाकर झा ने फिर पलट दिया। झा ने अपने निर्णय में स्पष्ट लिखा है कि अधीनस्थ न्यायालय का आदेश विधि अनुरूप पारित न होने से इसे विधिक धरातल पर ​स्थिर रखा जाना उचित नहीं है।


जांच में खामियां उजागर
पाराशर ने तहसीलदार रहते जो आदेश पारित किया। उसी आदेश की प्रथम अपील सुनी और स्वयं के पारित मूल आदेश को निरस्त कर दिया।
पाराशर ने 1 दिसंबर 2014 को हुए आदेश की प्रथम अपील 12 साल विलंब को माफी दी जाकर सुनवाई के लिए स्वीकार किया।


तहसील न्यायालय के 2014 के आदेश को यह तर्क देते हुए निरस्त किया कि अधीनस्थ न्यायालय वसीयतनामा प्रमाणित करने की अधिकारिता नहीं होने का तथ्य उल्लेखित करते हुए निरस्त किया।
पहले जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में हुए बदलाव को भी नजरअंदाज कर दिया, क्योंकि उक्त जमीन के बटांकन बंटवारे हो चुके हैं।
मानवीय त्रुटि हुई थी


मानवीय त्रुटि के कारण मामला एसडीएम न्यायालय में दर्ज हो गया था। जिसे वरिष्ठ स्तर से निरस्त कर दिया गया है। प्रकरण भी नस्तीबद्ध हो चुका है।
 

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