खरगोन। शासन की ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ योजना लागू होने से पहले ही विरोध के घेरे में आती नजर आ रही है। पंजीयन विलेख में पटवारी का नाम निष्पादक के रूप में शामिल किए जाने के विरोध में मंगलवार को जिलेभर के पटवारी एकजुट हुए और प्रदर्शन किया।
पटवारी मैला मैदान पर एकत्रित हुए, जहां से रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां पटवारियों ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा और योजना में उन्हें रजिस्ट्री प्रक्रिया का हिस्सा बनाए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई।
पटवारियों का कहना है कि शासन द्वारा नागरिकों को जमीन का स्वामित्व देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, लेकिन पंजीयन दस्तावेज में पटवारी का नाम निष्पादक के रूप में शामिल करने से भविष्य में उनके लिए कानूनी विवाद और व्यक्तिगत जवाबदेही की स्थिति पैदा हो सकती है।
पटवारियों ने सवाल उठाया कि जब जमीन का स्वामित्व भूमिस्वामी और शासन के बीच दस्तावेजी प्रक्रिया का विषय है, तो बीच में पटवारी को निष्पादक बनाकर उसकी व्यक्तिगत जवाबदेही क्यों तय की जा रही है। उनका कहना है कि भविष्य में स्वामित्व से जुड़े विवाद सामने आने पर पटवारियों को भी मुकदमों में पक्षकार या जिम्मेदार बनाया जा सकता है।
पटवारियों ने बताया कि आबादी भूमि के मामलों में केवल नक्शा और खसरा ही पर्याप्त आधार नहीं होते। वास्तविक कब्जा किसका है, वारिस कौन हैं, सह-स्वामित्व किसका है, चतुस्सीमा सही है या नहीं, पुराने दावे क्या हैं और किसी न्यायालय में विवाद लंबित है या नहीं, ऐसे कई बिंदु भविष्य में विवाद का कारण बन सकते हैं।
पटवारियों ने आशंका जताई कि यदि पंजीयन दस्तावेज में उनका नाम निष्पादक के रूप में दर्ज रहेगा तो भविष्य में किसी पक्ष द्वारा स्वामित्व को चुनौती दिए जाने की स्थिति में उनकी व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय हो सकती है।
पटवारियों ने कलेक्टर के माध्यम से शासन से मांग की है कि उन्हें ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ योजना में निष्पादक के रूप में शामिल न किया जाए और उनकी आपत्तियों का निराकरण किया जाए।