खरगोन। न्यायिक शिक्षा को व्यवहारिक अनुभव से जोड़ने की दिशा में शासकीय विधि महाविद्यालय, खरगोन के विद्यार्थियों ने तहसील न्यायालय परिसर में आयोजित लोक अदालत का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली और लोक अदालत की कार्यप्रणाली को नजदीक से समझा।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दिग्विजय सिंह मण्डलोई के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने लोक अदालत की कार्यवाही का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस दौरान जिला न्यायाधीश राजकुमार यादव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए लोक अदालत के स्वरूप, उपयोगिता और त्वरित एवं सुलभ न्याय की अवधारणा पर विस्तार से जानकारी दी।
न्यायाधीश यादव ने सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89 और वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली (एडीआर) के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि लोक अदालत न्यायालयों पर लंबित मामलों के बोझ को कम करने के साथ ही आपसी सहमति के आधार पर विवादों के समाधान का प्रभावी माध्यम है। इसके जरिए पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण तरीके से विवादों का समाधान किया जा सकता है।
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों में न्यायिक प्रक्रिया की बारीकियों को समझने को लेकर उत्साह नजर आया। विद्यार्थियों ने न्यायिक कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक चंद्रभान त्रिवेदी एवं तृप्ति जायसवाल, पैरा लीगल वालंटियर मुशर्रफ खान, हरीश कोठे और खेमराज बुंदेला सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
महाविद्यालय प्रबंधन के अनुसार इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ न्यायिक प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हैं, जो भविष्य में उन्हें कुशल अधिवक्ता के रूप में तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।