ओंकारेश्वर। ज्योतिर्लिंग नगरी में चल रहा 32वां संगीतमय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ अब अपने चरम पर है। अखिल भारतीय दशोरा नागर समाज धर्मशाला ट्रस्ट के तत्वावधान में 18 से 26 सितंबर तक चल रही इस कथा के छठवें दिन गुरुवार को ऐसा दृश्य बना कि पूरा पंडाल विवाह मंडप बन गया।
कथा व्यास पंडित दिलीप चंद्र तारे (उमरखली वाले) ने जब मंच से कहा - "रुक्मिणी कोई साधारण राजकुमारी नहीं, साक्षात लक्ष्मी हैं", तो पंडाल में सन्नाटा छा गया। उन्होंने सुनाया कि कैसे विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी ने देवर्षि नारद से कृष्ण के गुण सुने और मन ही मन उन्हें पति मान लिया। लेकिन भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया।
तब रुक्मिणी ने वो किया जो हर भक्त को करना चाहिए - हिम्मत कर एक ब्राह्मण के हाथों श्रीकृष्ण को प्रेम-पत्र भेजा। और फिर भक्त की एक पुकार पर द्वारकाधीश रथ लेकर कुंडिनपुर दौड़े चले आए, सभी दुष्ट राजाओं को हराया और अपनी लक्ष्मी को हरण कर ले गए।
जैसे ही झांकी सजी, बरसे फूल - कथा के दौरान कृष्ण-रुक्मिणी की सजीव झांकी सजाई गई। दूल्हा बने श्रीकृष्ण और सोलह श्रृंगार में सजी रुक्मिणी को देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। महिलाओं ने बधाई गीत गाए, फूल बरसाए और भजनों पर जमकर नृत्य किया। पूरा पंडाल "रुक्मिणी-कृष्ण की जय" से गूंज उठा।
व्यास जी ने कहा - भागवत सिर्फ सुनने की नहीं, जीने की कथा है। जब तक अभिमान है, भगवान दूर हैं, और जहां विरह है, वहीं भगवान दौड़े चले आते हैं।
कल बुधवार को जहां कृष्ण जन्मोत्सव पर ओंकार पुल से धर्मशाला तक भव्य शोभायात्रा निकली थी, वहीं आज विवाह उत्सव ने भक्ति को और गहरा कर दिया।
इस अवसर पर आयोजन समिति अध्यक्ष अरुण कुमार दशोरे, सचिव अशोक कुमार गुप्ता, प्रदेश सचिव आरती गुप्ता (सनावद) सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।