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October 9, 2026, 12:36 pm
BIG NEWS : खेत खाली, किसान परेशान और अफीम नीति 2026-27 का इंतजार, जिलाध्यक्ष तरुण बाहेती ने उठाई आवाज, सांसदों से मांगा जवाब, जल्द फैसला नहीं तो किसानों के साथ सड़क पर उतरेगी कांग्रेस, नारकोटिक्स कार्यालय के घेराव की दी चेतावनी, पढ़े खबर 

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नीमच। वर्ष 2026-27 की अफीम नीति जारी नहीं होने से मालवा-मेवाड़ के अफीम काश्तकार असमंजस में हैं। खेत तैयार हैं, लेकिन किसान यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि इस बार कितने रकबे में अफीम की बोवनी करें। पिछले वर्ष 11 सितंबर को नीति जारी हो गई थी, जबकि इस बार अक्टूबर में भी किसान घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। नीति में देरी से बोवनी और फसल प्रभावित होने की आशंका के बीच क्षेत्रीय सांसदों की चुप्पी तथा पट्टा वितरण में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

यह मुद्दा जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने उठाया है। उन्होंने कहा कि मालवा-मेवाड़ अंचल के लाखों अफीम काश्तकारों का भविष्य नीति की घोषणा में हो रही देरी से प्रभावित हो रहा है। किसानों को यह स्पष्ट नहीं है कि इस बार उन्हें कितने रकबे में अफीम की खेती की अनुमति मिलेगी। ऐसे में खेत तैयार होने के बावजूद बोवनी को लेकर निर्णय लेना मुश्किल हो रहा है।

बोवनी में देरी से फसल प्रभावित होने की आशंका-
बाहेती ने कहा कि अफीम की फसल के लिए समय पर बोवनी महत्वपूर्ण है। इसमें देरी होने पर आगे चलकर कड़ाके की ठंड और मौसम में अचानक बदलाव का असर पौधों की वृद्धि, डोडों तथा अफीम के रस की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। इससे किसानों की उपज और आय प्रभावित होने की आशंका है।

उन्होंने कहा कि इस बार क्षेत्र में कम बारिश के कारण खेतों की नमी तेजी से घट रही है और मिट्टी कठोर होती जा रही है। किसान अफीम के पट्टे मिलने की उम्मीद में खेत खाली रखे हुए हैं। यदि वे वैकल्पिक फसल की बोवनी कर देते हैं और बाद में अफीम का पट्टा जारी होता है, तो वे अफीम की खेती से वंचित रह सकते हैं। इस असमंजस ने काश्तकारों की परेशानी बढ़ा दी है।

सांसदों की चुप्पी पर उठाए सवाल-
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने मंदसौर-नीमच के सांसद सुधीर गुप्ता और चित्तौड़गढ़ के सांसद सीपी जोशी की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लाखों किसानों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सांसदों को केंद्र सरकार और नारकोटिक्स विभाग के समक्ष किसानों का पक्ष मजबूती से रखना चाहिए।

बाहेती ने कहा कि जनता ने सांसदों को किसानों की आवाज उठाने के लिए चुना है, लेकिन नीति जारी होने में देरी के बावजूद प्रभावी हस्तक्षेप नजर नहीं आ रहा है। पिछले वर्ष 11 सितंबर को नीति जारी हो गई थी, जबकि इस बार अक्टूबर का पहला सप्ताह बीतने के बाद भी घोषणा नहीं हुई है। इससे किसानों में पट्टों की तारीख, पात्रता, नियम और खेती के लिए स्वीकृत रकबे को लेकर असमंजस बना हुआ है।

पट्टा वितरण में पारदर्शिता की मांग-
बाहेती ने नारकोटिक्स विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि नीति में देरी और पात्र किसानों की सूची सार्वजनिक नहीं होने से बिचौलियों के सक्रिय होने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पट्टा दिलाने के नाम पर किसानों से सौदेबाजी किए जाने की शिकायतें भी सामने आती हैं।

उन्होंने बताया कि वे पूर्व में उप नारकोटिक्स आयुक्त (डीएनसी) से मिलकर मांग कर चुके हैं कि नीति जारी होते ही इस वर्ष पट्टा पाने वाले पात्र किसानों की सूची विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए। उनका कहना है कि जब शासन के अन्य विभागों में पात्र लाभार्थियों की सूचियां सार्वजनिक की जाती हैं, तो अफीम पट्टा वितरण में भी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।

पुराने कटे पट्टे बहाल करने की मांग-
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने वर्ष 1990 और 1995 से मामूली तकनीकी कारणों अथवा विसंगतियों के चलते पट्टे गंवा चुके गरीब काश्तकारों के पट्टे बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पट्टा वितरण की प्रक्रिया को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए, ताकि पात्र किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

नीति तत्काल जारी करने की मांग, आंदोलन की चेतावनी-
बाहेती ने केंद्र सरकार से वर्ष 2026-27 की अफीम नीति तत्काल जारी करने, पात्र काश्तकारों की सूची विभागीय वेबसाइट पर सार्वजनिक करने और पुराने कटे पट्टों को बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि वे अपनी जमीन और बोवनी को लेकर उचित निर्णय ले सकें।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने जल्द नीति जारी नहीं की, पात्र किसानों की सूची सार्वजनिक नहीं की और किसानों की मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस अफीम काश्तकारों के साथ नारकोटिक्स कार्यालय का घेराव करेगी। इसके बाद भी समाधान नहीं हुआ तो किसानों के साथ आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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