चित्तौड़गढ़। स्थानीय गांधीनगर स्थित समता भवन में महासती पूर्वीश्री ने प्रवचन के दौरान कहा कि दीपावली का पर्व धनतेरस से ही प्रारंभ हो जाता है। भगवान महावीर का निर्वाण दिवस तप, त्याग, नियम, प्रत्याख्यान, स्वाध्याय और संयमपूर्ण साधनाओं के माध्यम से मनाया जाना चाहिए। धर्ममय जीवन अपनाने से व्यक्ति में आत्मनियंत्रण बना रहता है और वह सांसारिक आकर्षणों से दूर रहकर संयम के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
महासती पूर्वीश्री ने भगवान महावीर स्वामी के अंतिम चातुर्मास से जुड़ा प्रसंग सुनाते हुए बताया कि उस समय राजा हस्तिपाल के राज्य में भगवान महावीर का अंतिम चातुर्मास चल रहा था। एक रात राजा हस्तिपाल ने विचित्र स्वप्न देखा। उसका अर्थ जानने के लिए वे भगवान महावीर स्वामी की सेवा में उपस्थित हुए। प्रभु ने स्वप्न का अर्थ समझाते हुए बताया कि स्वप्न में शक्तिशाली हाथी का कीचड़ में फंसना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में जैसे-जैसे धन-संपत्ति बढ़ेगी, वैसे-वैसे अधिकांश व्यक्ति विषय-विकारों और कषायों में उलझते जाएंगे तथा धर्म से दूर होते जाएंगे।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में विरले साधक ही नियमपूर्वक धर्म आराधना करेंगे और अनासक्त भाव से जीवन व्यतीत करेंगे। कुछ लोग धन-संपत्ति का उपयोग धर्म कार्यों में करेंगे, जबकि अधिकांश लोग पद, प्रशंसा, यश और अनुकूलताओं की चाह में उसे खर्च करेंगे। पंचम आरे का प्रभाव रहेगा, लेकिन संयमशील और धर्म में रत आत्माएं इन परिस्थितियों से अप्रभावित रहेंगी। महासती ने कहा कि भगवान महावीर द्वारा बताए गए परिवर्तन वर्तमान समय में भी दिखाई दे रहे हैं। आगामी 21 हजार वर्षों तक भगवान महावीर का जिनशासन रहेगा और समय के साथ परिवर्तन होते रहेंगे, फिर भी धर्म और ध्यान में लीन आत्माएं अपने मार्ग पर स्थिर रहेंगी।
महासती पूर्वीश्री ने भगवान महावीर के निर्वाण दिवस को तप और साधना के साथ मनाने का आह्वान किया। उन्होंने 7, 8 और 9 तारीख को तीन दिवसीय उपवास कर अधिकाधिक धर्म लाभ लेने की प्रेरणा दी। किसी कारणवश उपवास संभव नहीं होने पर तीन दिनों तक एकासन, बियासना और पोरसी करने तथा तेला तप अवश्य करने की बात कही। उन्होंने संवर के साथ साधना करने पर भी जोर दिया।
उत्तराध्ययन सूत्र का पाठ सुनाकर दिया धर्म संदेश-
प्रवचन सभा में महासती सुश्रिया ने उत्तराध्ययन सूत्र का पाठ सुनाया और धर्मबोध कराया। उन्होंने श्रद्धालुओं से समय का सदुपयोग करते हुए नियमित रूप से अधिकाधिक स्वाध्याय करने तथा भगवान महावीर के निर्वाण दिवस पर साधना का संकल्प लेने की अपील की।
संघ के करणसिंह सेठिया ने बताया कि समता भवन में गुरुवार से दो दिवसीय बालक-बालिका धर्म संस्कार शिविर आयोजित किया जा रहा है। दोपहर 12.30 से 3.30 बजे तक चलने वाले इस शिविर में 108 बालक-बालिकाएं भाग ले रहे हैं। महिला मंडल, बहू मंडल एवं महिला समिति की अध्यक्ष सरोज सुराणा सहित पदाधिकारी और सदस्य पूरे उत्साह के साथ शिविर की व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं।
संघ अध्यक्ष शंकर सुराणा ने सभी श्रद्धालुओं से अधिकाधिक धर्म लाभ लेने की अपील की। महासती पूर्वीश्री ने अपनी साधना के समय में से भी बालक-बालिकाओं को संस्कार प्रदान करने के लिए समय दिया, जिसके लिए संघ ने उनके प्रति आभार व्यक्त किया। धर्मसभा में मंजू पोखरना ने भक्ति गीत प्रस्तुत किया।