चित्तौड़गढ़। भगवान कृष्ण (ठाकुरजी) जब भक्त नरसी मेहता के बुलावे पर सेठजी का वेश बदल कर मायरा भरने आए तो हजारों श्रद्धालु दोनों हाथ उठाकर जयकारा लगाने लगे बोलो कृष्ण कन्हैया लाल की जय। नरसी मेहता के साथ सुरदास संतो की आंखो की रोशनी आ गई। नरसी की दरिद्रता पर जो गांव के लोग पहले हंस रहे थे। वह मायरे में सोने-चांदी जेवरात देखकर साथ हो गए। ढोल ढ़माकों के साथ ठाकुरजी भक्त नरसी मेहता की बेटी नानी बाई का मायरा भरने आए। चारों तरफ उत्साह था। लोग भाव विभोर हो गए। संजीव झांकियों के साथ संगीतमय कथा के दौरान यह नजारा शहर के दीपक गार्डन में पुंगलिया परिवार द्वारा आयोजित नानी बाई का मायरा कथा में तीसरे दिन समापन पर ठाकुरजी द्वारा लाए गए मायरा प्रसंग पर देखने को मिला। व्यास पीठ से संत दिग्विजयराम ने कथा सुनाते कहा कि नानी बाई का मायरा कथा भक्त व भगवान के अटूट प्रेम का संदेश देती है। किसी निर्धन परिवार की हंसी उड़ाकर उसका अपमान नही करना चाहीए।
उन्होने कथा के दौरान बताया कि हमारे पास जो मुद्रा है। देश के बाहर जाते ही साथ नही देती है।दूसरे देश की मुद्रा में कनवर्ड करवानी पड़ती है। कूछ वर्ष पूर्व लोगों के घरों में पड़े नोट कागज की रददी हो गए। इसलिए कागज के नोटों पर अभिमान नही करना चाहीए। परोपकार, सेवार्थ से कमाया धन आपके पास आएगा। उस धन को कन्वर्ड करवाने की जरुरत नही पड़ती। परोपकार पुण्य में कभी ढ़ील नही करनी चाहीए। संत दिग्विजय राम ने कहा कि वास्तविक धनवान वो है जो नामरुपी धनवान है।सुदामा,नरसी के पास नाम की संपती थी। संत ने बताया कि कथाएं, प्रसंग जीवन जीना सिखाते है।माथे पर तिलक लगाने को लेकर बताया कि तिलक लगाने में शर्म नही करनी चाहीए। माथे पर तिलक लगाने वाले स्थान पर आज्ञा शक्ति की धूरी होती है। चंदन शिथिलता प्रदान करता है। बच्चों को हमारे सनातन धर्म संस्कृति से संस्कारवान करना चाहीए। संत दिग्विजयराम ने कथा के दौरान कहा कि भौतिकवाद में अपने संस्कारों को भूल चुकी उस पीढ़ी को जगाने की जरुरत है।वर्तमान में माता-पिता को तस्वीर में पूजने वाली संतानों पर कटाक्ष करते संत दिग्विजयराम ने कहा कि कई पुत्र माता-पिता को वृद्वाआश्रम में छोड़ आते है।मृत्यु के बाद तस्वीर पर फूल चढ़ाते है।जीवीत रहते उन्हे खुन के आंसु रुलाते है। संत ने बताया कि बच्चों को बड़ो के चरण छूने की शिक्षा जहां मिलेगी वह बच्चे रिश्ता निभा पाएगें। उन्होने बताया कि माता-पिता व गुरु का कर्ज कभी नही उतारा जा सकता है। राम भज ले हरि का नाम जप ले,श्रीमन नारायण,नारायण नारायण,मां-बाप को मत भूलना आदि भजनों की सुमधूर प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथा के दौरान संत रमताराम भी मंचासीन थे।
आयोजक दीपक पुंगलिया ने बताया कि कथा कार्यक्रम के दौरान सांसद सीपी जोशी, विधायक चंद्रभानसिंह आक्या, कलक्टर अरविंद कुमार पोसवाल, एडीएम गीतेश मालवीय उपस्थित हुए। संतो का आशीर्वाद लिया। आभार संजय पुंगलिया ने व्यक्त किया। विष्णु काबरा ने नरसीजी का वेश बनाकर मंचन किया।पुंगलिया परिवार द्वारा संतो की आरती की गई।
हमारी संस्कृति का एक-एक कार्य विज्ञान की कसौटी पर खरा उतरा है
संत दिग्विजयराम ने कथा के दौरान कहा कि भारतीय संस्कृति का एक-एक कार्य विज्ञान की कसौटी पर खरा उतरा है।आज सनातन धर्म पर हमे गर्व होना चाहीए। उन्होने बताया कि दुनिया की किसी युनिवर्सिटी में जाओं उनकी अपनी एक पहचान होती है।सब धर्माे की पहचाने होती है। सिक्खों की पगड़ी का पुरी दुनिया में सम्मान है। हमें हमारे धर्म संस्कृति की पहचान को छीपाना नही चाहिए।
पक्षी दाना के लिए दिया सहयोग
बूंदीरोड़ स्थित रामद्वारा में प्रतिदिन कबुतर व तोतों को करीब 3 क्विंटल अनाज डाला जाता है। पक्षियों के दाने के लिए कथा के दौरान भक्त श्रद्धालुओं द्वारा खुले मन से सहयोग किया गया।