सरवानिया महाराज। श्रीमद्भागवत कथा बताती है कि मनुष्य पापों से बचें , पाप की मार बहुत गहरी होती है। भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण के विराट दर्शन के बाद माता कुंती ने भगवान से अपनी झोली मे भगवान के सारे कष्टों को मांग लिया। यह बात कथा के दुसरे दिवस मेवाड़ महामण्डलेश्वर 1008 चेतनदास महाराज मुंगाणा के शिष्य संत अनुजदास महाराज ने ग्राम रुपपुरा के समीप रंकावली माता मे कहीं। धर्म प्रेमी श्रावकों को संबोधित करते हुए अनुजदास महाराज ने कहा की जीवन मे रुखी सुखी खा लेना , दुःख सहलेना लेकिन कभी किसी का एहसान मत लेना , दुःख टल जायेगा एहसान सारी उम्र आपकी बोलती बंद कर देगा। एहसान करनेवाले के गलत निर्णय मे आपको दबा देगा। जब भीष्म पितामह बाणों की शैय्या गिरे तो द्रोपदी हंसने लगी तब भीष्म बोले मे उस वक्त धृतराष्ट्र का नमक खा रहा था उसके एहसान तले दबा था उस एहसान ने मेरी बोलती बंद कर रखी थी।इसलिए पुत्री मे चीरहरण नही रोक सका। आज भीष्म रणभूमि मे बाणों की शैया पर उत्तराणयन की प्रतीक्षा कर रहे है । वेदों मे दो यन दक्षिणायन और उत्तराणयन बताये है। भगवान योगेश्वर का एक नाम उत्तराणायन भी है। संत श्री ने कहा की खानपान बिगड़ने से रावण की विद्वता समाप्त हो गई , पुरा परिवार बिगड़ गया। राजा दशरथ ने अपना खान पान सुधारा तो परिवार आज भी युगों युगों से समाज को मर्यादा मे रहने की दिशा दे रहा है। आज राजा परीक्षित के स्वर्ण मुकूट मे कलयुग का प्रवेश हो गया। जंहा जुठ , शराब , मांस भक्षण , पर स्त्री गमन होता है वंहा कलयुग का वास होता है। भजन इतना तो करना स्वामी जब प्राण निकले तन से पर भक्त भाव विभोर हो गये। कथा विश्राम पर आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।
अरावली पर्वतमाला के शिखर पर स्थित शक्तिपीठ मां रंकावली के परिसर मे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन समिति द्वारा किया जा रहा है। सतत कथा का यह तेंहरवा वर्ष है। कथा दिनांक 8 जनवरी से 14 जनवरी तक प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से 4 बजे तक चलेगी। इस दौरान ठा. कैलाश सिंह पंवार आंकली , आशाराम अहीर , रानीपुरिया ठाकुर , पटेल तुलसीराम पाटीदार सरवानिया , ओमप्रकाश राव आमलीभाट, दिनेश वीरवाल सहित बड़ी संख्या मे महिलाएं पुरुष उपस्थित थे। कथा का संचालन राजकुमार राव ने किया।