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वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
March 25, 2023, 1:20 pm
BIG NEWS : प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का नीमच दौरा और पूर्व विधायक का बड़ा आरोप, बोले- लंबे समय बाद फिर खोदा पहाड़ और निकली चुहियां की कहावत को चरितार्थ कर गए घोषणावीर, पढ़े खबर 

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नीमच। मेडिकल कॉलेज के नामकरण का श्रेय तो यशपाल सिसौदिया को मिलना चाहिये। नीमच के बैरिस्टर उमाशंकर त्रिवेदी को भूल गये जो मध्यप्रदेश के मंदसौर के साथ राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के सांसद रहे और तत्कालीन जनसंघ दल को गठित करने वाले संस्थापक सदस्य थे। यह बात पूर्व विधायक डॉ. संपत स्वरूप जाजू ने कही। उन्होंने सर्वप्रथम वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज चैनल को सीएम शिवराज के संपूर्ण कार्यक्रम का शानदार कवरेज करने पर साधुवाद दिया। 

इसके बाद कहा कि वॉइस ऑफ एमपी की टीम के द्वारा प्रकाशित की गई खबरों की चर्चा कल शाम से अभी तक हर नुक्कड़, चाय की दुकान और पान की दुकान पर हो रही हैं कि मुख्यमंत्री के दौरे से क्षेत्र को क्या मिला क्या घोषणाएँ की और उनके पीछे क्या मंतव्य था मुख्यमंत्री का और किसने क्या माँगे रखी थी और उन मांगों को मुख्यमंत्री ने कितना गंभीरता से लिया। नीमच ज़िले ने क्या पाया और क्या अपेक्षा थी पर कितना मिला। अब यह प्रश्न यह उठता हैं कि मुख्यमंत्री नीमच के लोगांे को मायूस किसकी कार्यशैली के कारण कर गये..?

प्रदेश स्तर के चुनावी मुद्दे पर उन्होंने सबसे अधिक समय दिया और ’रेवड़ी संस्कृति’ की पैरवी करते हुए युवा और आधी आबादी को साधने पर ही ध्यान केंद्रित रखा जो स्पष्ट दर्शाता है कि समयानुसार विभिन्न उम्र के मतदाताओं को रिझाने का कार्य करेगा।
नीमच ज़िला अगर आश्वासनों की सलीब पर लटका हैं तो उसका दोष संपूर्ण रूप से स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिनमें प्रमुख रूप से विधायक और सांसद हैं को जाता हैं।
विकास एक सतत निरंतर प्रतिक्रिया हैं जिसको दूरदृष्टि और सोच से आगे बढ़ाता हैं। यह क्षेत्र का दुर्भाग्य हैं कि लगातार जनप्रतिनिधि बनने के बाद भी अगर क्षेत्र विकास का कोई रॉडमैप आपके पास नहीं हैं तो मुख्यमंत्री से क्यों अपेक्षा रखी जाये की वे सौंग़ातांे की घोषणा करें। जनप्रतिनिधि ( सांसद) तो केवल अपनी स्वयं की तथाकथित महिमा मंडित कर गये, जिसकी सच्चाई नीमच ज़िले का आम व्यक्ति अच्छी तरह जानता हैं। सांसद ने नीमच ज़िले के बारे में क्या घोषणा करनी चाहिये उसका उल्लेख तक या अनुरोध तक नहीं किया। 
यही स्थिति स्थानीय विधायक की रही मुख्यमंत्री के सामने आगे आने वाले चुनाव को देखते हुए उन्होंने केवल मुख्यमंत्री की महिमा मंडित करना ही अपना धर्म समझा। उन्होंने नीमच के लिये कोई भी ऐसी योजना नहीं रखी जिसको मुख्यमंत्री संज्ञान में लेकर घोषणा करते।
मुख्यमंत्री ने माता रानी भादवा माता के कारिडोर बनाए जाने की घोषणा की, उसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की और प्रभारी मंत्री का कोई प्रस्ताव ही नहीं था। मुख्यमंत्री ने धार्मिक भावनाओं का लाभ उठाया जो वे प्रदेश के हर धार्मिक स्थल पर कारिडोर बनाने की घोषणा का एक हिस्सा हैं।
मेडिकल कॉलेजांे के नामकरण का भी प्रस्ताव स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने नहीं रखा। यह प्रस्ताव तीन माह पूर्व संसदीय क्षेत्र के मंदसौर विधायक नए पत्र लिखकर मुख्यमंत्री के सम्मुख रखा गया था, जिसको मुख्यमंत्री ने भावनात्मक नाटक करते हुए घोषित किया। 
बंगला-बगीचा के सरलीकरण करने का आश्वासन दिया हैं जो विगत कई वर्षों से करते आ रहे हैं। उन्होंने कोई समय सीमा घोषित नहीं की। 
मुख्यमंत्री के नीमच दौरे का कुल लब्बोलबाब यही हैं कि वे अपनी स्वयं की ब्रांडिंग को पुख़्ता कर गये और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर आम लोगों से लेकर विभिन्न मीडिया ( सोश्यल, इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट इत्यादि) को चर्चा करने का मुद्दा दे गये।

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