दूदरसी । गांव धनेरिया कलां में आयोजित श्री मद्भागवत गीता के छठवें दिन श्री कृष्ण रुक्मिणी विवाह का आयोजन किया गया जिसमें दो बालिकाओं ने श्री कृष्ण और रूक्मिणी का अभिनय किया और दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर इस इस आयोजन को संपन्न किया।इस कथा के अधिकृत यजमान बने कैलाश अहीर व बाबूलाल नागदा ने सपत्नीक कन्यादान किया तत्पश्चात उपस्थित सभी श्रोताओं ने भी कन्यादान कर पुण्य कमाया।
सर्व प्रथम पोथी पूजन कर आरती की गई फिर भागवताचार्य ने कथा प्रारम्भ की। श्री भागवताचार्य ने देवकी के आठवें गर्भ से उत्पन्न संतान को पटक कर मारना चाहा तो वह पुत्र नहीं वल्कि महामाया थी जो हाथ से छूट कर अदृश्य हो गई और अष्टभुजा रूप दिखाते हुए बोली कि हे दुष्ट तुझे मारने वाला तो गोकुल में बड़ा हो रहा है इस दृश्य को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया जिसका श्रोताओं ने करतल ध्वनि से अभिवादन किया । आपने पूतना द्वारा बाल कृष्ण को विषपान अपने स्तनों से कराना चाहा तो कृष्ण ने उसके शरीर से सारा खून चुस लिया और उसका वध किया।
श्री भागवताचार्य ने इंन्द्र का घमंड भी चूर चूर कर दिया और पुरी गोकुल नगरी को गोर्वधन पर्वत अपनी तर्जनी ऊंगली से उठाकर भारी बारिश से बचा लिया तभी से दिपावली को गोवर्धन पूजा की जाती है। श्री कृष्ण रूक्मिणी विवाह पर गुरूजी ने यह भजन प्रस्तुत किया ,आज मेरे श्याम की शादी है, श्याम की शादी है मेरे घनश्याम की शादी है पर महिलाओं ने जमकर नृत्य किया।अंत में महाआरती की गई और भागवत भगवान को भोग लगाकर नुक्ती पांचामृत और केले का प्रसाद वितरण किया गया।