नीमच। जब किसी भी मौसम का सितम बढ़ता है तो उसकी मार सबसे पहले गरीब पर पड़ती है। चाहे वह भीषण गर्मी हो, ठिठुरन भरी सर्दी हो या घनघोर वर्षा। गरीब बस्ती और वहां रहने वाले बच्चों की जीवन शैली मौसम की बेदर्दी का वास्तविक नजारा बयां करती है। किसी भी प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा असर देखना चाहते हैं तो उस गरीब बस्ती में जीने वाले मासूम और प्यारे बच्चों की जिंदगी से आप अंदाजा लगा सकते है।
गरीब बस्तियों के हालात आपको बताएंगे कि इस चिलचिलाती धूप में बच्चे कैसे जीवन बसर कर रहे है। अगर हमारे बच्चे का पैर जलती जमीन पर इस गर्मी में पड़ जाता है तो हमारा कलेजा फट जाता है। इंसानियत के नाते हम सोच सकते हैं कि गरीब के बच्चे इस तपती धूप में कैसे नंगे पैर रहते होंगे। जब हमारे घर के कूलर और पंखे गरम हवा देने लग गए हैं, तापमान 48 डिग्री पहुंच गया है, ऐसे हालात में हमारे ही नीमच शहर के अटल बस्ती और एकता बस्ती जैसे इलाकों के कई बच्चों को आप नंगे पैर सड़क पर चलते देख सकते हैं। मां बाप की गरीबी इसका बड़ा कारण है।
हेल्प फ्रॉम हार्ट सोशल आर्गेनाइजेशन से जुड़े हेमंत रावल की नजर जब अटल बस्ती के बच्चों के नंगे पैरों पर पड़ी तो उन्होंने ऑर्गेनाइजेशन की भानुप्रिया बैरागी को अवगत कराया और टीम के सदस्यों को लेकर अटल बस्ती पहुंचे। इन सब ने पैरों में छाले पड़ जाने वाली धूप में गरीब बच्चों के पैरों में अपने हाथों से चप्पल पहनाई। बच्चों के पैरों में चप्पले देख गरीब मां-बाप की खुशी का ठिकाना ना रहा। यह पहल निश्चित ही काबिले तारीफ है।
इस नेक काम में हेमंत रावल, भानुप्रिया बैरागी, राकेश माली, सत्यनारायण, सुनील नागदा, हेमलता नागदा का सहयोग अनुकरणीय रहा। इस तरह की पहल और जमीनी समाज सेवा की आज परम आवश्यकता है।