मुरैना। अंबाह जनपद पंचायत के संगोली ग्राम पंचायत में शमशान तक जाने के लिए पक्की रोड तक नहीं है अगर गांव में किसी भी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उस कच्चे रास्ते से निकलने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है आगे बरसात का मौसम आने वाला है और बरसात के मौसम में उस रास्ते में घुटने तक कीचड़ हो जाता है जब गांव में किसी व्यक्ति की मौत हो जाए। तो उस रास्ते से शव को कंधों पर रखकर ले जाने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है अभी थोड़ी सी ही बरसात हुई। जिसके कारण रास्ते का यह हाल हो गया हाल ही में गांव में गुड्डी देवी पत्नी विश्वनाथ सिंह तोमर की मौत हो गई उस महिला के शव को श्मशान तक ले जाने के लिए कई बार रास्ते में जगह-जगह शव को जमीन पर रखना पड़ा तब कहीं जाकर श्मशान तक शव को ले जाया गया है गांव से शमशान की दूरी डेढ़ किलोमीटर की है वह भी पूरा कच्चा रास्ता है नदी किनारे बने श्मशान में पक्का टीन सेट तक नहीं है अगर बरसात में किसी व्यक्ति की मौत हो जाए तो उसे जलाने के लिए बरसात बंद होने का इंतजार करना पड़ता है ग्रामीणों का कहना है कि हम गांव के लोग ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि बरसात के समय गांव में किसी भी व्यक्ति की मौत ना हो क्योंकि उस शव को जलाने के लिए जो परेशानी उठानी पड़ती है वह नहीं उठानी पड़े। एक तरफ तो सरकार गांव रहने वाले लोगों के लिए विकास की तमाम सारी योजनाओं का संचालन कर रही है लेकिन गांव अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं यह सब प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण हो रहा है 1 वर्ष पूर्व गांव में रिटायर्ड फौजी की बरसात के समय मौत हो गई थी। उस समय ग्रामीणों को उस शव को शमशान तक ले जाने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ी यह ख़बर भी मीडिया पर खूब प्रसारित हुई और उस समय अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए उस रोड का निर्माण कराने के लिए आदेश भी कर दिए लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के चलते पता नहीं क्या हुआ कि 1 वर्ष बाद भी उस रोड का निर्माण नहीं किया जा सका। आज भी सांगोली गांव के ग्रामीणों को शमशान तक शव को ले जाने के लिए बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है।