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June 10, 2023, 12:14 pm
NEWS : पंच दिवसीय श्रीराम महायज्ञ में तृतीय दिवस 300 यजमानों ने दी आहूतियां, कल्लाजी के भजनों से गूंज उठा कथा मंडप, पढ़े रेखा खाबिया की खबर   

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चित्तौड़गढ़। निम्बाहेड़ा में अष्टादश कल्याण महाकुंभ के सप्तम दिवस शुक्रवार को श्रीराम यज्ञशाला में पंच दिवसीय श्रीराम महायज्ञ के तृतीय दिवस 350 से अधिक युगल यजमानों ने शाकल्य एवं गौघृत्य की आहूतियां देते हुए घर देश प्रदेश में चहूं ओर खुशहाली की कामना की। इस मौके पर आचार्य वीरेन्द्रकृष्ण दोर्गादत्ती, वेदपीठ के पदाधिकारी एवं न्यासियों के साथ ही बड़ी संख्या में रेबारी एवं रायका समाज के यजमानों ने अपने आराध्य के प्रति आस्था प्रकट करते हुए यज्ञ किया। इस दौरान वेदपीठ के आचार्यों एवं बटुकों के मंत्रोच्चार के साथ यजमानों ने ब्राह्माण्ड के समस्त देवताओं, ग्रहों, ठाकुर श्री कल्लाजी सहित पंच देवों एवं भगवान श्रीराम के मंत्रों के साथ आहूतियां दी गई। तृतीय दिवस के यज्ञ विश्राम के बाद बड़ी संख्या में मौजूद यजमानों एवं दर्शनार्थियों द्वारा यज्ञ की परिक्रमा की गई। जिसमें से कई श्रद्धालु 108 तक परिक्रमा करते हुए देखे गए। बड़े सवेरे से लेकर संध्या आरती तक श्रद्धालुओं द्वारा यज्ञशाला की परिक्रमा का दौर चलता रहा।  

21 द्रव्यों से हुआ ठाकुर जी का महारूद्राभिषेक-
 
कल्याण महाकुंभ के सप्तम दिवस ठाकुरजी का 21 द्रव्यों से महारूद्राभिषेक किया गया। जिसके बड़ी संख्या में श्रद्धालु साक्षी बनें। मंगला दर्शन के साथ ही रूद्रभिषेक की परंपरा अनवरत जारी है।
  
व्येंकटेश भगवान के रूप में ठाकुर जी के दर्शन-
  
वेदपीठ पर विराजित कल्याण नगरी के राजाधिराज ठाकुर जी कल्लाजी सहित पंच देवों का महाकुंभ के दौरान नित नया श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। इसी कड़ी में महाकुंभ के सप्तम दिवस शुक्रवार को ठाकुर जी को स्वर्ण आभा में भगवान व्येंकटेश का स्वरूप धराया गया, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा। सतरंगी फूलों के बीच सजे ठाकुरजी अनुठे व्येंकटेश में उनकी छवि रामानुज रूप में देखकर कई भक्त अचंभित होते नजर आए। इस दौरान समूचा वेदपीठ मनोहारी  झांकी से सुसज्जित रहा जिसे देखकर सैकड़ों भक्त यह कहने को विवश हो गए कि कल्याण नगरी के राजाधिराज की महिमा ही निराली है। 
256 थाल में सजा छप्पनभोग बना आकर्षण का केन्द्र 

यूं तो प्रतिवर्ष प्रतिदिन कल्याण महाकुंभ के दौरान ठाकुर जी को छप्पन भोग लगाया जाता रहा है, इसी कड़ी में शुक्रवार को विभिन्न प्रकार के मिष्ठानों एवं चटपटे व्यजनों के साथ कई प्रकार की सामग्री से भरपूर 256 थाल में सजा छप्पनभोग भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा। कई भक्त कभी थाल गिनते तो कभी मिष्ठानों का नाम पूछते नजर आए। समूचा वेदपीठ प्रथम बार इतने बड़े छप्पनभोग की झांकी से सुसज्जित रहा। 

राम वनवास के भावयुक्त गूढ़ रहस्य से परिवार में एक्यता का भाव अपनाए- स्वामी सुदर्शनाचार्य

स्वामी सुदर्शनाचार्य ने भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग में वाल्मिकी रामायण के भाव पक्ष का गूढ़ रहस्योंद्घाटन करते हुए कहा कि उससे प्रेरणा लेकर हमेशा परिवार में एक्यता का भाव अपनाना  चाहिए ताकि वर्तमान में टूटते परिवारों को जोड़ा जा सके। स्वामी सुदर्शनाचार्य शुक्रवार को वाल्मिकी कथा मंडप में व्यासपीठ से कथा अमृतपान करा रहे थे। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरूषोत्तम का मानव रूप में जन्म जगत के कल्याण के लिए हुआ था। जिसके फलस्वरूप जब राजा दशरथ द्वारा भरी राज्य सभा में अयोध्यावासियों की ओर से एक स्वर में राम को राज्याभिषेक का उद्घोष सुना तो उन्होंने भी राम को युवराज घोषित करने का निर्णय ले लिया। यह सुखद समाचार सुनकर माता कौशल्या ने अपनी समस्त दासियों को अनुठे उपहार देते समय एक चूक कर दी। जिसमें उनके द्वारा कैकयी की प्रमुख दासी मंत्रा को उपहार देने से चूक गई, जो गृहकलेश का कारण बना। वहीं दूसरी ओर राजा दशरथ द्वारा भी राम के राजाभिषेक का सभी देशों के राजाओं एवं ऋषि मूनियों को निमंत्रण देने के बावजूद कैकई नरेश को आमंत्रित करने में चूक हो गई, यहीं चूक राजा दशरथ के घर में बड़े कलेश का कारण बनी। जिसके फलस्वरूप कैकई ने कोप भवन में पहुंच कर की राजा दशरथ से दो वचनों में राम को वनवास व भरत को राज्याभिषेक मांग लिया। दूसरी ओर स्वामी जी ने श्रीराम के जन्म की अवधारणा को प्रकट करते हुए कहा कि श्रीराम ने जब स्वयं के राज्याभिषेक की बात सुनी तो उन्हें चिंता लगी कि उनका जन्म तो संसार की भलाई करते हुए मर्यादा पुरूषोत्तम का रूप दिखाना था। अगर राजा रामचन्द्र बन गए तो वह विशाल स्वप्न अधूरा रह जाएगा। ऐसी स्थिति में राम ने अपनी प्रिय माता कैकयी के कक्ष में जाकर माता से वचन लेकर अपने मंतव्य को प्रकट करते हुए कहा कि मॉ यदि आप मुझसे सच्चा प्रेम करती हो तो मुझे वचन देकर कृतार्थ करना होगा। मॉ कैकयी ने राम से पूछा कि ऐसी कौनसी खास बात है जिसे राज्याभिषेक से पूर्व करना चाहते हो, तब राम ने गुप्त मंत्रणा करते हुए कहा कि मेरे जीवन का उद्देश्य पूर्ण करने के लिए भले ही आपकों कलंक का टीका लगवाना पड़े अथवा सामाजिक रूप में बदनाम होना पड़े, लेकिन आप किसी भी स्थिति में मेरे राज्याभिषेक को टाल कर वनवास भेजने का जतन करें। यह कहकर जब राम कक्ष से बाहर निकले तो मंथरा दासी ने भी उदास भाव से समस्त देवों के आग्रह पर मॉ सरस्वती की प्रेरणा से विपरित भाव से आकर राम के राज्याभिषेक के संदेश के साथ भरत को राजा बनाने व राम को वनवास देने का वचन लेने की जिद्द की और आखिर कैकयी ने वहीं किया जिसके फलस्वरूप राजा दशरथ द्वारा राम को गहरी विवशता के साथ चौदह वर्ष के वनवास के लिए कहना पड़ा। स्वामी जी ने रहस्योद्घाटन के साथ ही राम वनवास के प्रसंग का मार्मिक वर्णन कर भक्तों को भाव विभोर कर दिया। प्रारंभ में स्वामी जी ने ठाकुरजी के भगवान व्येंकटेश स्वरूप के मन मोहक दर्शन करते हुए कहा कि आज का श्रृंगार तो मन को आल्हादित करने वाला है। इसके साथ ही विशाल छप्पनभोग को देखकर भी स्वामी जी कहने लगे कि वेदपीठ और इससे जुड़े भक्त धन्य है। वहीं वेदपीठ के न्यासियों द्वारा व्यासपीठ की पूजा अर्चना की। 

गुरूवार संध्या वेला में व्यासपीठ की महाआरती के दौरान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी, पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीचन्द कृपलानी, जिला अध्यक्ष गौतम दक, भूपेन्द्रसिंह बड़ौली, मिठ्ठूलाल जाट, रतन गाडरी, अशोक नवलखा, नितिन चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं वेदपीठ के न्यासी एवं पदाधिकारी मौजूद थे। इस दौरान व्यासपीठ की ओर से आगंतुक अतिथियों का तुलसी माला एवं उपरणा ओढ़ाकर स्वागत किया गया। वहीं अतिथियों ने भी व्यासपीठ का आशीर्वाद लिया।  

कल्लाजी के भजनों से गूंज उठा कथा मंडप- 

महाकुंभ के षष्ठम दिवस वाल्मिकी कथा मंडप के विशाल मंच पर उदयपुर के कमलेश राव, मोनू वैष्णव, हरीश वैष्णव, रमेश मेनारिया एवं साथियों द्वारा दी गई मनभावन भजनों की प्रस्तुति के दौरान समूचा कथा मंडप ठाकुर श्री कल्लाजी के भजनों से गूंजता रहा। इस दौरान कमलेश राव ने अपने ही अंदाज में ठाकुरजी का आह्वान करते हुए अमलकसूबा को भोग लगावा, हम कथा सुनाते है सकल गुण धाम की के साथ ही कई मनभावन भजनों की प्रस्तुतियों के बीच जीवन्त झांकियों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया। इस दौरान माताजी के भजनों के साथ ही हनुमानजी, शिव जी, गणेश जी एवं अन्य देवों के साथ वीरवर कल्लाजी जयमल जी और महाराणा प्रताप के भजनों से कलाकारों ने श्रोताओं की खूब तालियां बटौरी। प्रारंभ में वेदपीठ की ओर से अतिथि कलाकारों का तुलसी माला और उपरणा ओढ़ाकर स्वागत किया गया। 

स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज का किया अभिनन्दन-
 
वाल्मिकी कथा मंडप में शुक्रवार को रामानुज सप्रदाय के गौरव लब्ध प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक सम्मानित विश्व प्रसिद्ध अशरफी भवन अयोध्या पीठ के स्वामी जगतगुरू रामानुजाचार्य श्रीधराचार्य जी महाराज का वेदपीठ की ओर से आत्मिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया। वैदिक विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन कैलाश मून्दड़ा ने बताया कि स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज श्री रंग मंदिर वृद्धावन के ट्रष्टी एवं अयोध्या पीठ के संस्थापक है।  

दिव्य दर्शन, यज्ञ की पूर्णाहुति व मातृपितृ पूजन रविवार को-

कल्याण महाकुंभ के अंतिम दिवस आषाढ़ कृष्णा अष्टमी रविवार 11 जून को प्रात: 8 बजे 51 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ ही कथा मंडप में सैकड़ों भक्तों द्वारा मातृपितृ पूजन किया जाएगा। वेदपीठ के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रात: 11 बजे मंदिर पर ध्वजारोहण उपरान्त दोपहर ठीक 12 बजकर 12 मिनट पर ठाकुरजी के प्राकट्यों उत्सव के रूप में दिव्य दर्शन एवं महाप्रसादी के साथ भव्य विशाल महाकुंभ संपन्न होगा।

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