नीमच। कानून बनाना बहुत ही जवाब देही का काम है, इसमें सांसद को कानूनी और जनता के जीवन की अनुभव की आवश्यकता तो होती ही है साथ ही दूरदर्शिता भी आवश्यक है, लेकिन देखने में आ रहा है कि इन दिनों सांसद और विधायक तो बस लोकसभा और विधानसभा में उपस्थित रहने वाले सदस्य ही मात्र बन गए हैं।
बने-बनाए विधेयक पेश हो रहे हैं। बिना बहस के विधेयक और कानून पास हो रहे हैं। यह बात वरिष्ठ अभिभाषक महेश पाटीदार ने एक विज्ञप्ति जारी कर कही।
उन्होंने कहा कि इसका खामियाना आज नहीं तो कल जनता को ही भुगतना पड़ेगा।
लोकसभा में बिना बहस के पास हुए इन कानून का ड्राइवर के ऊपर तो प्रभाव पड़ेगा ही साथ में जनहित पर प्रभावित होगा। अभी तो इस कानून की पहली धारा के खिलाफ ही आक्रोश उत्पन्न हुआ है। जैसे-जैसे कानून के सारे प्रावधान जनता के सामने आते जाएंगे वैसे-वैसे और भी आक्रोश सामने आता जाएगा।
राजनीतिक पार्टियों को चाहिए कि कानून बनाने से पहले वे जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच व्यापक बहस के लिए प्रस्तुत करें और उसके बाद ही इसे लोकसभा में पेश करें।
लोकसभा में भी यह सुनिश्चित हो कि हर कानून और हर धारा पर व्यापक बहस होती रहे, अन्यथा यह लोकतंत्र प्रजातंत्र की ओर बढ़ता रहेगा।