मुरैना। देश और प्रदेश में सर्दी चरम पर है और मकर संक्रांति का भी त्योहार है। ऐसे में खस्ता और मीठी गजक का स्वाद मानो और बढ़ गया है, मुरैना की तो पहचान ही गजक से है।
दुनियाभर में मुरैना को गजक के लिए ही जाना जाता है। गजक के शौकीनों के अनुसार मुरैना की गजक की बात ही कुछ अलग है, दरअसल गजक की उत्पत्ति ही मुरैना से हुई है, तिल और गुड़-शक्कर से बने इस लजीज मिष्ठान ने मुरैना को दुनियाभर में प्रसिद्ध कर दिया है। सबसे खास बात तो यह है कि मुरैना के नाम से केवल मुरैना में ही गजक बेची जा सकती है और किसी शहर में नहीं। मुरैना की गजक की ऐसी डिमांड है कि देशभर में दुकानदार मुरैना गजक के नाम से ही गजक को आसानी से बेच देते हैं। ठंड का मौसम शुरु होते ही जिले से देशभर के लिए गजक की सप्लाई प्रारंभ हो जाती है।
व्यापरियों के अनुसार सर्दी के दिनों में इम्युनिटी बढ़ाकर तंदुरुस्त रखने वाली गजक का कारोबार इस बार कम हैं। देश के महानगरों के अलावा विदेशों तक मुरैना की गजक जाती थी। मुरैना की गजक की तासीर सिर्फ चंबल का पानी है। गजब तो देश और प्रदेश में कई जगह बनाई जाती है और मुरैना के नाम से ही बेची जाती हैं, लेकिन मुरैना के पानी में जो मिठास है वह अलग ही है। इस कारण से मुरैना जैसी गजब देश और प्रदेश में कहीं भी नहीं मिलती है।
मुरैना में कई सालों से गजक बन रही हैं, इसी कारण यहां बनने वाली गजक के शौकीन न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में खूब हैं, इसीलिए मुरैना की गजक दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, सूरत, अहमदाबाद जैसे देश के बड़े महानगरों के अलावा सात समंदर पार इंग्लैण्ड, अमेरिका तक जाती है।