नयागांव। निंबाहेड़ा दिगंबर जैन समाज की ओर से शनिवार के घट यात्रा निकाल कर धर्म ध्वजा फहरा कर पंचकल्याणक महोत्सव की शुरुआत की। समाज के प्रवक्ता मनोज सोनी के अनुसार शनिवार को आदर्श कॉलोनी स्थित नवीन जिनालय से दिगंबर जैन समाज की ओर से भव्य शोभायात्रा निकाली। जिसमे समाज की महिलाओ ने अपने सिर पर घट धारण कर श्री जी के समक्ष भक्ति प्रकट की। नवीन शांतिनाथ जिनालय से प्रारंभ हुई शोभायात्रा में प.पू. आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य प.पू. मुनिश्री विमलसागर जी महाराज, प.पू. मुनिश्री अनंतसागर जी महाराज, प.पू. मुनिश्री धर्मसागर जी महाराज एवं प.पू. मुनिश्री भावसागर जी महाराज के सानिध्य में एवं ब्रह्मचारी प्रदीप भैयाजी सुयश अशोक नगर के निर्देशन में निकली जो कॉलोनी के प्रमुख मार्गो से होती हुई आदिनाथ मांगलिक भवन में जाकर एक धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।
शनिवार से प्रारंभ हुए 14 फरवरी तक चलने वाले आनंद प्रदायक पंचकल्याणक महामहोत्सव के अंतर्गत 10 फरवरी 2024 विविध धार्मिक कार्यक्रम का शुरुआत ध्वजारोहण का सौभाग्य आर के मार्बल परिवार के अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी, शांता पाटनी, विमल पाटनी वंडर सीमेंट परिवार किशनगढ़ के द्वारा प्राप्त किया गया। बाद में मुनि वृंदो की उपस्थिति में पांडाल शुद्धि, मण्डप शुद्धि, वेदी शुद्धि, मंडल शुद्धि, मण्डप प्रतिष्ठा, वेदी प्रतिष्ठा, मण्डल प्रतिष्ठा संस्कार की मांगलिक क्रियाए संपन्न कर धर्मावलंबीयो ने गर्भ कल्याणक पूर्वरूप उत्तररूप की क्रियाएं संपन्न कराई। कार्यक्रम में अरथुना जैन समाज के द्वारा निर्माणाधीन पाषाण के मंदिर में शिखर मे सहयोग देने पर अशोक पाटनी परिवार का सम्मान भी किया गया। वहीं पंचकल्याणक में भगवान के माता पिता बनने पर अनिल दोसी सुषमा दोसी बागीदौरा का सम्मान पंचकल्याणक समिति के द्वारा किया गया।
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री विमल सागर जी महाराज जी ने कहा कि जिस जीव के पंचकल्याणक मनाने जा रहे हैं उस जीव ने भावनाएं भायी थी, जो जितना झुकता है ऊंचाईयों पर पहुंचता है। यह मंडप मंदिर का रूप ले चुका है, शुद्धि का ध्यान रखें ,जो जगत का कल्याण करने वाले हैं उन भगवान का जन्म होगा। पूरे विश्व में गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का यश फैल रहा है। यह उनकी माता श्रीमती पिता मल्लप्पा जी का प्रभाव है। सभी संताने मोक्ष मार्ग मे बढी है, राजस्थान धन्य हो गया जहां आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की दीक्षा हुई। प्रतिदिन 14 करोड़ दिव्य रत्नों की वर्षा होती है भगवान के जन्म के पूर्व इस धरा ने राजस्थान के भामाशाह अशोक पाटनी को जन्म दिया जो धर्म की ध्वजा फहराते रहते हैं, उनकी भावनाएं थी की सबको इस महोत्सव में भाग लेना है। इस अनुष्ठान को विधि पूर्वक करना है। समाज के अध्यक्ष सुशील काला और महामंत्री मनोज पटवारी के अनुसार रविवार को प्रातः कालीन बेला में 5.45 बजे मंगलाष्टक, दिग्बंधन, रक्षामंत्र, शांतिमंत्र, नित्यमह अभिषेक, शान्तिधारा, पूजन, तीर्थंकर बालक का जन्म, अयोध्या नगरी में बधाइयां, अयोध्या नगरी की परिक्रमा, अयोध्या में प्रवेश, सौधर्मइंद्र शचि का अलौकिक दृश्य, सहस्त्र नेत्रो से तीर्थंकर बालक के दर्शन के अलावा ऐरावत हाथी पर आरूढ़ सौधर्मइंद्र शचि द्वारा तीर्थंकर बालक को लेकर पंडुक वन की ओर प्रस्थान पांडुक शिला पर 1008 कलशों द्वारा तीर्थंकर बालक का अभिषेक श्रृंगार आदि कार्यक्रम के अलावा मुनि श्री के प्रवचन, शांतिहवन, इंद्रसभा एवं राजदरबार, इंद्राणी द्वारा प्रथम दर्शन, इंद्र द्वारा सहस्राक्ष दर्शन तथा सायं 6.30 बजे संगीतमय महाआरती, शास्त्र प्रवचन, 7.30 बजे सौधर्म इंद्र द्वारा तांडव नृत्य बालक आदिकुमार का पालना झुलाना एवं बाल क्रीड़ा का मनोहारी दृश्य आदि कार्यक्रम होंगे।