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February 14, 2024, 8:23 pm
NEWS : श्रीमद् भागवत महा पुराण मोक्ष दायिनी व पावन को भी पावन करने वाला महाग्रंथ-पंडित विकास नागदा, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। श्री कल्लाजी महाराज के कृपा पात्र गौनन्दन भागवताचार्य कथा व्यास पंडित विकास नागदा ने कहा कि चोरों वेदों को समाहित करने वाला श्रीमद् भागवत महा पुराण पावन को भी पावन करने वाला तथा मोक्ष दायिनी महाग्रंथ है। इसका श्रवण करने मात्र से प्राणी का उद्धार हो जाता है। 
कथा व्यास नागदा बसंत पंचमी के पावन अवसर पर श्री कल्लाजी वेदपीठ एवं शोध संस्थान की ओर से वेदपीठ परिसर निम्बाहेड़ा में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा के प्रथम दिवस व्यासपीठ से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने श्रीमद भागवत के महात्म का विस्तार करते हुए कहा कि 88 हजार ऋषि मुनियों को सूत जी महाराज ने कथा श्रवण कराकर उन्हें धन्य किया। इसी प्रकार महर्षि नारद मुनि के मार्गदर्शन में भक्ति महारानी के दो पुत्र ज्ञान और वैराग्य की कथा का विस्तार करते हुए कहा कि भक्ति तो युवा रही, लेकिन उनके दोनों पुत्र ज्ञान वैराग्य वृद्धावस्था को प्राप्त हो गए। ऐसी स्थिति में हरिद्वार में नारद द्वारा श्रीमद भागवत कथा अमृतपान कराने के दौरान भक्ति महारानी आनंदित हो गई। वहीं कथा श्रवण मात्र से ज्ञान वैराग्य भी पुन: युवा अवस्था में पहुंच गए। 
कथा व्यास नागदा ने आत्मदेव के जीवन वृतांत को प्रकट करते हुए कहा कि वे पुत्र की चाह रखते थे, लेकिन ऋषि के अनुसार उन्हें सात जन्म तक भी पुत्र प्राप्ति का योग नहीं होने के बाद भी लगातार आग्रह करने पर ऋषि ने एक फल दिया। जिसे आत्मदेव की पत्नि ने न खाकर गाय को खिला दिया। फलस्वरूप ऋषि पत्नि को धूंधूकारी और गाय ने गौकर्ण जी को जन्म दिया। धूंधूकारी दुष्ट प्रवृत्ति था, जबकि गौकर्ण ज्ञानी थे। जिन्होंने अपने भ्राता के रूप में धूंधूकारी का मोक्ष करने के लिए श्रीमद भागवत कथा का श्रवण कराया, जिसके फलस्वरूप धूंधूकारी को भी मोक्ष की प्राप्ति हो गई। 
कथा व्यास ने कथा का विस्तार करते हुए कहा कि श्रीमद भागवत कथा कराने के लिए कथा व्यास में चार गुण होने चाहिए। जिनमें से व्यक्ति में विरक्ति, समर्पण, ब्राह्मण एवं वेदपाठी होना आवश्यक है। साथ ही कथा श्रवण के दौरान पूरे मनोयोग से ईश्वर के प्रति आस्था रखते हुए, जो व्यक्ति कथा श्रवण करता है वह सभी पापों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त हो सकता है। इस दौरान पंडित प्रहलाद कृष्ण एवं साथियों द्वारा भजनानन्दी स्वर लहरियों के साथ मनभावन भजनों की प्रस्तुतियों से वेदपीठ का समूचा परिसर भक्तिरस से सराबोर हो गया। कथा संचालन करते हुए दिलीपसिंह ने प्रथम दिवस की कथा का सार प्रस्तुत किया। तत्पश्चात भागवत की महा आरती की गई।

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