नीमच। भक्ति और तपस्या से जीवन में सब कुछ मिल सकता है। धार्मिक तपस्या में जीव दया का पालन करना चाहिए तभी उसका फल मिलता है। पवित्र मन से की गई तपस्या और भक्ति का फल की पुण्य फल मिलता है।यह बात वैराग्य सागर जी महाराज साहब ने कही।वे दिगंबर जैन समाज नीमच द्वारा दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित शांतिवर्धन प्रवचन वर्षा योग धर्म सभा में बोल रहे थे ।उन्होंने कहा कि तपस्या और भक्ति का फल कभी निष्फल नहीं जाता है उसका पुण्य अवश्य मिलता है।
वर्धमानसागर जी महाराज के सुशिष्य मुनि सुप्रभ सागर जी मसा ने कहा कि संत को आहार दान करते हुए पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए नहीं तो पुण्य तो नहीं मिलता है उल्टा पाप हो जाता है। संसारी जीव का अंत कभी नहीं आता है। संसारी जीव और और करता रहता है। मनुष्य लक्ष्मी के पीछे भागता है वह चंचला होती है वह उल्लू पर बैठकर आती है। और मनुष्य को उल्लू बनाकर चली जाती है। इसलिए जो लक्ष्मी के पीछे जाता है उसका मोक्ष छूट जाता है।
इस अवसर पर भजन गायक कलाकार द्वारा यहां हर किसी को नहीं मिलता का गुरु का प्यार जिंदगी में, गुरुवर तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए कहता हूं तकदीर बदल जाए...., केसरिया केशरिया आज हमारो रंग केसरिया ...,बजे कुंडलपुर में बधाई की नगरी में वीर जन्मे महावीर जी..., आदि भजन प्रस्तुत किए।
उक्त जानकारी दिगम्बर जैन समाज एवं चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विजय विनायका जैन ब्रोकर्स, मिडिया प्रभारी अमन विनायका ने दी।