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July 26, 2024, 5:07 pm
KHABAR : श्रावन मास में कीजिए विशेष रुद्राभिषेक और फल की प्राप्ति, ज्यौतिष पंडित सुमन्त पुरोहित ने बताई देवों के देव महादेव की महिमा, पढ़े बद्रीलाल गुर्जर की खबर 

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झांतला। भगवान शिव देवों के भी देव हैं इसलिए इन्हें महादेव कहा जाता है। इसके साथ ही ये बहुत ही जल्दी प्रसन्न होने वाले देव हैं। भगवान शिव को सच्चे मन से यदि एक लोटा जल भी अर्पित कर दिया जाए तो वे प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए इन्हें भोलेनाथ भी कहते हैं। फिर भी यदि किसी के मन में कोई विशेष कामना हो तो भगवान शिव प्रसन्न करने के लिए सबसे अच्छा उपाय माना जाता है, रूद्राभिषेक। जिसका अर्थ होता है, मंत्रोच्चार करते हुए विभिन्न द्रव्यों और पदार्थों से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। अलग-अलग मनोकामना की पूर्ति के लिए अलग-अलग द्रव्यों से भगवान शिव जी का रूद्राभिषेक करना चाहिए। तो चलिए जानते हैं कि किस मनोकामना के लिए किस पदार्थ से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए।
 कुशा -असाध्य रोग से मुक्ति के लिए  यदि कोई असाध्य रोग से पीड़ित है या फिर जातक की कुंडली में रोगेश की दशा चल रही हो तो ऐसे में कुशाजल से भगवान शिव का रूद्राभिषेक करवाना चाहिए। माना जाता है कि इससे आपको असाध्य रोग से भी निजात मिल जाती है।
 धन प्राप्ति-
यदि आप धन प्राप्ति करना चाहते हैं तो गन्ने के रस से भगवान शिव का रूद्राभिषेक करवाना चाहिए। इसके अलावा धन वृद्धि के लिए शहद और घी से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। 
 संतान सुख की कामना पूर्ति के लिए-संतान सुख हर मनुष्य के जीवन में सारी धन-संपत्ति से ऊपर होता है। यदि आपको संतान सुख और परिवार में खुशहाली की कामना हैं तो दूध से भगवान शिव का रूद्राभिषेक करवाना चाहिए।
 ज्वर से मुक्ति पाने के लिए- यदि कोई ज्वर सी पीड़ित हैं और औषधि से भी लाभ नहीं हो पा रहा है तो गंगा जल या शीतल जल से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। माना जाता है कि इससे तेज ज्वर से भी राहत मिलती है।
 तेज बुद्धि पाने के लिए-यदि आप अपनी बुद्धि को तेज करना चाहते हैं तो दूध में शक्कर मिलाकर रुद्राभिषेक करवाना चाहिए। माना जाता है कि यदि कोई मंदबुद्धि भी शक्कर मिश्रित दूध से अभिषेक करता है तो उसकी बुद्धि भी तेज हो जाती है।
 भूमि-भवन और वाहन प्राप्ति के लिए-यदि कोई भूमि-भवन और वाहन की कामना रखता है तो उसे भगवान शिव का रूद्राभिषेक दही से करवाना चाहिए। मान्यता है कि दही से रूद्राभिषेक करने से भूमि-भवन और वाहन की प्राप्ति होती है।
 शत्रु और मार्केश दशा से बचने के लिए-यदि आप शत्रुओं से परेशान हैं, शत्रु आपके ऊपर हावी हो रहे हैं तो ऐसे में आपको सरसों के तेल से भगवान शिव का रूद्राभिषेक करवाना चाहिए। यदि आपकी कुंडली में मार्केश की दशा बन रही है तो भी सरसों के तेल से शिव जी का अभिषेक करना चाहिए।
 ’इत्र मिश्रित जल से अभिषेक -’यदि आपका दांपत्य जीवन खुशहाल नहीं है तो आपको सावन मास में भगवान शिव को इत्र मिले जल से अभिषेक करना चाहिए। इससे पति-पत्नी के संबंध मधुर बनेंगे।
 गन्ने का रस -यदि आप अपने जीवन से बेहद दुखी हैं तो ऐसे में आप गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें। ऐसा करने से आपके घर में खुशियां लौट आएंगी।
 वंश वृद्धि के लिए-सावन मास में शिवलिंग पर शुद्ध देशी घी से अभिषेक करें। ऐसा करना घर परिवार में तरक्‍की लाता है और वंश का विस्तार भी होता है।
 बिल्वपत्र-भगवान के तीन नेत्रों का प्रतीक है बिल्वपत्र। अतरू तीन पत्तियों वाला बिल्वपत्र शिव जी को अत्यंत प्रिय है। प्रभु आशुतोष के पूजन में अभिषेक व बिल्वपत्र का प्रथम स्थान है। ऋषियों ने कहा है कि बिल्वपत्र भोले-भंडारी को चढ़ाना एवं 1 करोड़ कन्याओं के कन्यादान का फल एक समान है। भगवान के तीन नेत्रों का प्रतीक है साथ ही बिल्वपत्र को जल में डालकर अभिषेक करने सभी पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
भगवान शिव तुरंत और तत्काल प्रसन्न होने वाले देवता हैं। इसीलिए उन्हें आशुतोष कहा जाता है। आइए जानते हैं भगवान शिव को प्रिय 11 ऐसी सामग्री जो अर्पित करने से भोलेनाथ हर कामना पूरी करते हैं। यह 11 सामग्री हैं रू जल, बिल्वपत्र, आंकड़ा, धतूरा, भांग, कर्पूर, दूध, चावल, चंदन, भस्म, रुद्राक्ष । इस प्रकार भगवान शिव की पूजा साधना, अभिषेक से अक्षुण्ण पुण्य की प्राप्ति होती है।

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