चीताखेड़ा। कौवा चला हंस की चाल, छिपकली मगरमच्छ की खाल पहनकर कभी मगरमच्छ नहीं बन सकती। छिपकली छिपकली ही रहेगी। ऐसी ही एक कहावत चीताखेड़ा में ग्राम पंचायत में चरितार्थ होती देखने को मिली है। केंद्र की मोदी सरकार की जिस जिसने बगावत की यानी कि अपना अधिकार मांगा तब तब प्रधानमंत्री ने इडी ने छापेमारी कर जेलों में ठूंस दिया। उसी तर्ज पर चीताखेड़ा में भी एक मामला देखने को मिला। गांव में स्ट्रीट लाइट खंबों पर बल्ब वेपरलेंप बंद होने से कई बार पंचायत में बैठे जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया। एक माह बाद भी किसी ने नहीं सुनी तो मुख्यमंत्री हेल्प लाइन पर शिकायत दर्ज करवाई तो पंचायत में बैठे जवाबदार तिलमिला उठे और बकाया टेक्स जमा करवाने का नोटिस थमा दिया।
हुआ यूं कि गांव के ही हर्षित सोनी ने अपने मौहल्ले में विगत महिना भर से स्ट्रीट लाइट खंबों पर बल्ब वेपरलेंप बंद होने से पंचायत में शिकायत दर्ज कराई जब एक माह तक किसी ने नहीं सुनी तो मुख्यमंत्री हेल्प लाइन नंबर पर घंटी- घनघना दी और शिकायत दर्ज कराई। फिर होना क्या था पंचायत में बैठे जवाबदार आग-बबूला हो गये। लाइट तो लगाई नहीं और मकान कर के एक हजार रुपए, प्रकाश कर के एक हजार 200 रुपए और सफाई कर के एक हजार 200 रुपए ऐसे करके कुल 3 हजार 400 रुपए का बकाया टेक्स जमा करवाने का मेरे पिताजी के नाम से नोटिस थमा दिया।
शिकायत कर्ता हर्षित सोनी ने बताया है कि हमारे मौहल्ले में न तो कचरा एकत्रित करने वाला वाहन आता है और ना ही कोई सफाई करने वाला काहे का सफाई टेक्स। विद्युत खंबों पर बल्ब वेपरलेंप बंद पड़े शाम ढलते ही गुप अंधेरा हो जाता है। मुझ पर शिकायत उठाने का दबाव बनाया जा रहा था नहीं उठाई तो बौखलाकर मुझे टेक्स बकाया का मेरे पिताजी के नाम से नोटिस थमा दिया। वैसे भी चीताखेड़ा में देखा जाए तो स्ट्रीट लाइट खंबों पर बल्ब वेपरलेंप बंद पड़े हुए हैं। देश की 78 वीं आजादी और सनातनियों का सबसे बड़ा पर्व रक्षाबंधन त्योहार पर भी गांव में अंधेरा क़ायम रहा है। यहां अंधेर नगरी चौपट राजा की तर्ज़ पर चल रही है ग्राम पंचायत।