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September 1, 2024, 4:49 pm
KHABAR : धर्मसभा में जैन संतों ने कहा- सुख-दुख चिंता छोड़, आत्मकल्याण की चिंता करो, बैर भाव को छोड़, क्षमापना को अपनाए, पढ़े खबर 

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मंदसौर। मनुष्य को अपने जीवन में केवल अपने आत्म कल्याण की चिंता करना चाहिए जीवन में सुख दुख आते हैं व जाते रहते हैं उनकी चिंता करने की बजाय मनुष्य को सदैव समभाव में रहना चाहिए। उक्त प्रवचन जैन साध्वी श्री रमणीक कुुंवरजी ने नई आबादी शास्त्री कॉलोनी स्थित जैन दिवाकर स्वाध्याय भवन में आयोजित धर्मसभा में कहे।

उन्होंने पर्यूषण महापर्व के पहले दिन रविवार को धर्म सभा में कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में समभाव का अंगीकार करना ही चाहिए जो भी मनुष्य समभाव में रहते हैं वह आत्म कल्याण के मार्ग की ओर अग्रसर हो सकते हैं। धर्मसभा में साध्वी श्री चंदनाश्रीजी ने भी अपने विचार व्यक्त किए । धर्मसभा का संचालन पवन जैन ने किया। धर्म सभा के उपरांत हंसराज मोतीलाल एचएम परिवार के द्वारा प्रभावना वितरित की गई।

जैन संत पन्यास प्रवर योगरूचि विजयजी ने नईआबादी आराधना भवन में आयोजित धर्मसभा में कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में किसी भी व्यक्ति या प्राणी के प्रति बैर भाव नहीं रखना चाहिये। बैर भाव के जो संस्कार है वह अगले भव में ही बने रहते है और हम बैर को छोड़ नहीं पाते है और अपनी गति खराब कर लेते है। इसलिये क्षमापना को अपनाओ। पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन धर्मसभा में क्षमापना की महत्ता बताते हुए कहा कि सभी के साथ प्रेम व भाईचारे से रहो। यदि किसी के साथ हमारे संबंध तनावपूर्ण है या यू कहे कि बैर भाव है तो क्षमा मांग लो। चाहे वह व्यक्ति पद, प्रतिष्ठा आयु में आपसे छोटा ही क्यों न हो। क्षमा मांगने से आपके मन में जो द्वेष या बैर के भाव है वह समाप्त हो जायेंगे। आपने कहा कि जब भी क्षमा मांगों उदारता से मांगों केवल शब्दों से नहीं अंतःकरण से भी क्षमा मांगों और क्षमा करो। आपने धर्मसभा में कहा कि जब भी कोई क्षमा मांगने आये तो अकड़ों मत उसे क्षमा कर दो और मन मस्तिष्क में जो बैर भाव है उसे समाप्त कर दो।

आपने भगवान महावीर के परम शिष्य गौतम स्वामी जी का वृतान्त भी बताया जो कि 500 शिष्यों के गुरू थे जब प्रभु महावीर ने उन्हें आनन्द श्रावक से क्षमा मांगने को कहा तो उन्होंने सहज सरल भाव से क्षमापना की जबकि आनंद श्रावक साधारण गृहस्थ थे हम सभी गौतम स्वामी से प्रेरणा ले। योगरूचिजी ने गन्ने का वृतांत बताते हुए कहा कि जहां गांठ होती है वहा रस नहीं होता। गन्ने में जगह-जगह गांठ होती है। वहां रस नहीं होता है इसलिये जीवन में बैर रूपी गांठ मत रखो यदि जीवन में बैर होगा तो वहां प्रेम नहीं होगा और यदि होगा भी तो केवल दिखावटी होगा।

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