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September 2, 2024, 7:37 pm
NEWS : पर्यूषण प्रवचन माला दूसरा दिन स्वाध्याय दिवस ब्रह्मचर्य साधना आत्मबल, मनोबल शरीर बल बढ़ाता है, मुनि संजय स्वाध्याय घर में झाडू निकालने के समान है और पायलट का काम करता है, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। शतावधानी मुनि श्री संजय कुमार के सानिध्य में पर्यूषण पर्व का दूसरा दिन स्वाध्याय दिवस के रूप में मनाया गया। मुनि श्री आचारांग सूत्र के आधार पर महावीर जीवन पर वाचन किया। पर्यूषण के महत्व को समझाया। ब्रह्मचर्य की साधना पर बल दिया कि पशु पक्षियों के भी नेसर्गिक नियम होते हैं। उसके प्रायः अतिक्रमण नहीं करते हैं। इंसान के 365 दिनों में कौनसी तिथि, वार, दिन के नियम है। कुछ भी नहीं होना, पशु से भी ज्यादा गिरा हुआ जीवन माना जाता है। पर्यूषण आत्म बल जगाने, मनोबल जगाने आया है। 70 वर्ष से अधिक उम्र वालों को तो अपनी पत्नी को धर्म बहिन बना देना चाहिए। भोग पीपास पर नियंत्रण से शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक लाभ है।
मुनि प्रसन्न ने स्वाध्याय पर बोलते हुए कहा कि स्वाध्याय का महत्व सभी धर्म संप्रदायों में है। स्वाध्याय 5 प्रकार से की जाती है। (1) वाचना- साहित्य धार्मिक हो। उसे पढ़ना पढ़ाना, जिससे आत्मबोध मिलता (2) पृच्छना जिज्ञासा समाधान प्रश्न प्रतिप्रश्न से शंका का समाधान भी होता है और प्रामाणिक ज्ञान वृद्धि होती है। (3) परिवर्तनायानि रिविजन, चिंतारना, पुनरावर्तन जैसे अपने धार्मिक मंत्र ऊँ शांति, राम राम आदि का माल के माध्यम से एक ही शब्द को बार बार दोहराना रिविजन स्वाध्याय, गीता, भागवत, जैन आगम, कुरान नवाज ईश ग्रंथ बाईबल, बौद्ध पिटिक, नानदेव, वाणी ग्रंथ साहिब आदि अपने अपने शास्त्रों को बार बार पढ़ना पारायण करना परिवर्तना स्वाध्याय है। (4) अनुप्रेक्षा- एक पद्य के भावाथ का मनन करना (5) धर्मकथा के माध्यम से स्वाध्याय करना। प्रावचन उपदेश के माध्यम से स्वाध्याय होती है। सद स्वाध्याय से आत्म बोध मिलता है। सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन की पाप्ति होती है। भले ही मंत्र ऊँ शांति आदि जड़ शब्द है किन्तु चेतनाशील प्राणी पर अच्छे मंत्र का अच्छा प्रभाव होता है। बुरे शब्द का बुरा प्रभाव होता है। जैन धर्म 2 प्रकार की तपस्या में भीतर की तपस्या स्वाध्याय है। सबसे ज्यादा महत्व स्वाध्याय को दिया है। रात दिन के 8 प्रहर में 4 प्रहर स्वाध्याय के लियें शास्त्रकारों ने रिजर्व रखे हैं। स्वाध्याय घन में सुबह सुबह झाडू निकालने के समान है। आत्मा की सफाई का अचूक सरल माध्यम है। स्वाध्याय पायलट का काम करता है। शून्य आकाश में भटकाव को रोकने का काम दिशा सूचक का काम करता है।

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