चीताखेड़ा। गांव चीताखेडा में रहवासी इलाकों में जर्जर व क्षतिग्रस्त पुराने मकान परेशानी बनते जा रहे हैं जिसके कारण आमजन डर के साए में जीने को मजबूर हैं। जहां रीवा जिले के गढ़ कस्बे में दीवार गिरने से चार मासूमों की ह्रदय विदारक हादसे में काल के गाल में समा गए वैसे ही अगर समय रहते इन जर्जर मकानों की सुध नहीं ली गई तो रीवा जैसी घटना की पुनरावृत्ति नगर चीताखेडा में हो सकती हैं। शायद स्थानीय प्रशासन (पंचायत) में बैठे जिम्मेदार जनप्रतिनिधि जनहानि के इंतजार में बैठे हुए हैं। पुराने जमाने के बने मकान गांव के हर गली-मोहल्ले, हर वार्ड में आज खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इन जर्जर मकानों से कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। कार्यवाही कौन और किस पर करें। अचरज की बात हैं कि खुद सरपंच का मकान भी पूरी तरह खंडहर और जर्जर हो चुका है। दिवारों से आए दिन पत्थर गिरते रहते हैं। राह से गुजरने वाले राहगीर खंडहर मकान की साइड छोड़कर निकलते हैं कहीं दीवार उपर नहीं गिर जाए।
सरपंच का जर्जर मकान जबकि घनी आबादी वाले क्षेत्र में और गांव के अति व्यस्ततम मार्ग पर स्थित है जो किसी भी समय गिर सकता है। खंडहर मकान से मात्र 100 फीट की दूरी पर लोट्स एकेडमी स्कूल संचालित है। स्कूली बच्चों का ज्यादा आवागमन लगा रहता है। खड़े कच्चे मकान की दीवारें मौत बनकर खड़ी है। स्कूली बच्चों एवं किसी भी राह से गुजरने वाले राहगीरों पर मौत बनकर गिर सकती है। बस स्टैंड से जैन गली चांदनी चौक के पास स्थित एक खंडहर से बारिश के चलते क्षतिग्रस्त पुरानी दिवाल का एक हिस्सा गिर गया। गनीमत यह रही की जान-माल की हानि नहीं हुई। ऐसे में होने वाली बड़ी दुर्घटनाओं को लेकर आम जनों ने चिंता जताई है। इसी तरह माणक चौक के पास अलग-अलग दो मकान जो कि पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुके हैं कभी भी राह से गुजरने वाले राजगीरों के ऊपर गिर सकते हैं।
स्थानीय निवासी रवि जैन का कहना है कि सरपंच का मकान जो कि पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है और दिवाले पूरी तरह से लटक गई है आए दिन क्षतिग्रस्त दीवारों से पत्थर मिट्टी गिरते रहते हैं कभी भी हादसा हो सकता है। इस मामले में कई बार पंचायत को अवगत करवाया गया है परंतु पंचायत द्वारा आज तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। रवि जैन ने बताया है कि एक बार मेरे पास ही बड़ा पत्थर गिरा गनीमत रही कि मैं बच गया। वैसे भी चीताखेड़ा गांव के हर गली-मोहल्ले में कई ऐसे खंडहर पड़े हुए हैं उन खंडहरों में मौहल्ले वासियों ने कचरे का कुड़ा दान बना दिया है। बारिश के कारण कचरा गिला हो जाने से भयंकर मच्छरों की भरमार हो गई है वहीं कचरा सडजाने से भयंकर बदबू आती है जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया है। इन खंडहरों से बारिश के कारण आए दिन जहरीले जानवर सांप-गोयरे रेंगते हुए दिखाई देते हैं। जवाबदार जनप्रतिनिधि पूरी तरह से लापरवाह बने हुए हैं।
वहीं ग्राम पंचायत चीताखेडा के सचिव नवीन पाटीदार का कहना हैं कि जिन लोगों के भी पुराने जमाने के कच्चे मकान खंडहर बन चुके हैं। कोई हादसे न हो उससे पहले पंचायत शीघ्र ही मलबा हटवाने का नोटिस जारी करेगी।