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September 3, 2024, 4:58 pm
NEWS : पयुर्षण पर्व आराधना में अभिनव सामायिक दिवस समता का नाम सामायिक है- मुनि प्रकाश कुमार, पढ़े रेखा खाबिया की खबर  

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चित्तौड़गढ़ । तेरापंथ सभा के मंत्री ललित सुराना ने बताया कि मीरानगर वर्धमान स्थानक में मुनि प्रकाश कुमार ने सामायिक अनुष्ठान पर बोलते हुए कहा कि जैन दर्शन में सामायिक का बड़ा महत्व है। सामायिक के मुख्य दो प्रकार है। सावधिक और यावज्जीवन पर्यंत। श्रावक के लिए सावधिक यानि वह 48 मिनिट की एक से लगा कर जीतनी करना चाहो कर सकता है। सामायिक में पापकारी (सावज्जंजोग) काम का 48 मिनिट तक का त्याग करता है। सामायिक 6 कोटि 8 कोटि, 9 कोटि सामायिक भी होती है। जैसी अपनी क्षमता, वैसा त्याग सामायिक में करता है। देखा जाए तो इसमें महत्वपूर्ण बात है। गृहस्थ के सावध हिंसा जन्य पापकारी कार्य को कितना छोड़ सकता है। उसमें समता देखी जाती है। जो संत बनता है वह जीवन भर के गृह कार्य छोड़ने की समता धार लेता है। इसीलिए संतोषी एवं महापुरुष की कोटि में आ जाता है।
भोग, विलासिता, संग्रह, हिंसा, स्वास्थ, लोठा की वृत्ति समता संतोष आए बिना नहीं छूटती। ये छूटे बिना आत्मा के लगने वाले पाप कर्म रूकते नहीं। रूकते नहीं तो आत्मा कर्मों से पहले ही भारी है। कई जन्मों से और भारी बनेगी तो दुर्गति में जाएगी। इसलिए सामायिक का संकल्प। सावज्जंजोगं, पच्च खामी। का त्याग संकल्प करने से पापों से बच जाता है।
मुनि प्रसन्न कुमार जी ने भी सामायिक पर बोलते हुए कहा कि शुद्ध सामायिक यानि सामायिक के काल मान में मन, वचन और काया से 32 दोष लगने की संभावना रहती है। इसलिए दोषों से बचने के लिए आचार्य श्री तुलसी ने अभिनव सामायिक का अनुष्ठान प्रयोग चलाया जिससे सामायिक में स्वाध्याय के विभिन्न प्रयोग चलते रहे। जैसे जप, स्तुति, स्तवन, ध्यान कार्योत्सर्ग आदि आध्यात्मिक प्रयोग से व्यस्त रहता है। अप्रमत्ता रहती है। दूसरी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। इसीलिए धार्मिक स्थानों में सामायिक करने से एकाग्रता रहती है। घर में करने से, घर के माकों की तरफ ध्यान जाता है।

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