मनासा। तहसील क्षेत्र के ग्राम भदवा में गुरुवार को किसान एकत्रित होकर पंचायत भवन पहुंचे तथा वहां अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि आय को दोगुना करने और कृषि को लाभ का धंधा बनाने के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं और किसान कर्ज के दलदल में फंसते जा रहे हैं। सोयाबीन फसल की उत्पादन लागत लगातार बढ़ने और बिक्री मूल्य लगातार घटने से किसान परेशान हैं। सोयाबीन की फसल को समर्थन मूल्य पर खरीदने एवं सोयाबीन का मूल्य 6 हजार रुपये करने की मांग को लेकर इन किसानों ने ग्राम पंचायत भदवा के सचिव को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि सोयाबीन की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जाए एवं सोयाबीन का दाम कम से कम 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
किसानों का कहना है कि सोयाबीन की फसल उन्हें घाटे का सौदा साबित हो रही है। इस फसल की उत्पादन लागत बढ़ती जा रही और कीमत घटती जा रही है। अगर इस फसल के दाम नहीं बढ़ाए जाते तो किसानों को यह घाटे का सौदा साबित होगा।किसानों ने बताया कि साल 2013-14 में सोयाबीन का मूल्य 4600 रुपये प्रति क्विंटल था तथा लागत राशि कम थी। वहीं, साल 2024 में 3800 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल इसके दाम हैं। जबकि अगर एक एकड़ में जुताई, बुआई, खाद और कीटनाशक की लागत निकाली जाए तो यह 25,150 रुपये प्रति एकड़ पड़ती है। जबकि एक एकड़ में जो सोयाबीन पैदा होता है, वह आज के भाव अनुसार बीस हजार रुपये का होता है, जिससे किसान को पांच हजार रुपये प्रति एकड़ घाटा हो रहा है।