BREAKING NEWS
KHABAR : नशा मुक्त भारत अभियान के तहत संस्कार.. <<     BIG REPORT : छात्रों की गूंज के जरिए राहुल गांधी ने.. <<     KHABAR : जिला अधिकारियों की बैठक में विभागीय.. <<     KHABAR : होमगार्ड विभाग का सात दिवसीय आपदा मित्र.. <<     KHABAR : जावरा में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार,.. <<     KHABAR : महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला.. <<     REPORT : 37 लाख रुपए की लागत से निर्मित अटल ग्राम.. <<     BIG REPORT : एसपी राजेश व्यास ने ली मैराथन अपराध.. <<     BIG NEWS : सीएम डॉ. मोहन का सुशासन पर जोर, कहा- न्याय.. <<     KHABAR : शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल बदलाव,.. <<     KHABAR : पीएम मोदी और सीएम मोहन यादव के पोस्टर पर.. <<     KHABAR : सिद्धान्त सिंह जादोन एवं भूमि अग्रवाल का.. <<     KHABAR : समीक्षा बैठक में नपा सीएमओ बामनिया ने.. <<     KHABAR : मनासा विधानसभा में विकास की रफ्तार तेज,.. <<     KHABAR : अगस्त माह की इस तारीख को जुटेगा भाजपा का.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
September 5, 2024, 7:43 pm
NEWS : जैन संत साधना की एक कसौटी है पंचमुट्ठी कैशलूंचन, प्रवचन सभा में मुनि प्रसन्न कुमार जी महाराज ने कहा, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

Share On:-

चित्तौड़गढ़। तेरापंथ सभा के मंत्री ललित सुराना ने बताया कि मीरा नगर वर्धमान सामायिक स्थानक में मुनि प्रसन्न कुमार जी ने अपने सिर के बाल (केशों) को लूंचन अपने हाथों से प्रवचन सभा में किया। जैन विधि में इसे पंचमुट्ठी केशलूंचन कहते हैं। यानि सिर के पांच हिस्से से दांए सिर के केश दांई और से ही खींच कर उतारे जाते हैं, वैसे ही आगे, बाएं, पीछे और चोटी के भाग के उसी रूप में केवल हाथ की अंगुलियों से विधि तरीके से खींच कर उतारने से दर्द कम होता है। उल्टी दिशा में केश खींचने से रूंतोड़ होने की संभावना रहती है। इस सारी प्रक्रिया में कोई शस्त्र काम नहीं लिया जाता है। केवल छाने की राख, जिससे बाल, हाथ की पकड़ में आने के बाद स्लिप न हो (छूटे नहीं) और कोई दवा आदि का उस्तरा मशीन का प्रयोग नहीं किया जाता है।
केश लूंचन जैन विधि के अनुसार संवत्सरी पर्युषण के अंतिम दिन से पहले उतारना अनिवार्य है। कुछ दिन पहले कोई चातुर्मास में लूचन करने वाला न मिले तो चातुर्मास पहले दूसरे संतों से करा सकते हैं। संवत्सरी पर गाय के बाल जितने बड़े केश (बाल) रख सकते हैं। जैन तीर्थंकर भी पंचमुट्टी केश लूंचन करते हैं। वैसे केशलूंचन साधु साध्वियाँ एक दूसरे का अपास में करते हैं। मुनि प्रसन्न कुमार करीब 35, 40 वर्षों से अपने दाढ़ी, मूंछ एवं सिर का केशलूंचन स्वयं अपने दोनों हाथों से करते हैं। दोनों हाथ चले तो ही स्वयं का स्वयं कर सकता है।
मुनि श्री तीन भाई और एक भतीजा 4 संत बने हुए हैं। एक ही परिवार के दिवेर (महाराणा प्रताप की विजय स्थली) में जन्में संजय मुनि को 58 वर्ष संत बने हो गये। प्रकाश मुनि को 50 वर्ष मुनि प्रसन्न को 47 वर्ष एवं धैर्य मुनि को 8 वर्ष संत बने हो गये हैं। आज युग में आधुनिक विचारधारा वाले को कैसा भी लग सकता है किन्तु साधना की कसौटी का एक मापदण्ड रहा हैं वैसे शारीरिक बीमारी आदि कठिनाई से कराना कठिन हो तो गुरू आज्ञा से प्रायश्चित विधि से कराया जा सकता है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE