चित्तौड़गढ़ । तेरापंथ सभा के मंत्री ललित सुराना ने बताया कि पर्युषण पर्व आराधना का (6) छठा दिवस जपयोग के रूप में शतावधानी मुनि संजय कुमार के सानिध्य में मनाया गया। मुनि श्री आचारांग का आगम का वाचन के पश्चात् महावीर जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला।
मुनि प्रसन्न कुमार ने जपयोग पर बोलते हुए कहा कि परिवर्तना, यानि पुनरावर्तन-रिविजन स्वाध्याय में मंच साधना की जाती है। मंत्र साधक के पास तीन शक्तियां होती है। आत्म शक्ति, मंत्र शक्ति एवं ईष्ट शक्ति, मंत्र भौतिक एवं अध्यात्मिक दो दृष्टी से मंत्रों की साधना होती है। भौतिक मंत्र में आसुरी शक्तियों को आह्वान किया जाता है और किसी दूसरे को बर्बाद करने में उपयोग किया जाता है। मंत्र साधना प्रायः नवरात्रि का समय उपर्युक्त रहता है। आध्यात्मिक मंत्र की साधना केवल आत्म शुद्धि आत्म शांति के लिए की जाती है। अन्य मंत्रों से आध्यात्मिक मंत्र शक्तिशाली होते हैं। आसुरी शक्तियां भी परास्त हो जाती है। मंत्र के पहले बीजाक्षर जोड़ने से उसका प्रभाव बढ़ता है। अधिष्ठायक देव देवी का सिंगासन चलायमान होने से सहयोग के लिए तत्पर सक्रिय हो जाते हैं, जैसे फोन नम्बर के पहले कोड नम्बर होते हैं। ग्रह शांति के लिए भी आध्यात्मिक मंत्रों की साधना की जाती है। मंत्र भले जड़ है किन्तु साधना से प्रभावशाली बन जाते हैं। बुरे मंत्र हो या अच्छे, दोनों का प्रभाव होता है।
मंत्र की साधना वाचिक बोल बोल कर किया जाने वाला जप होता है। उपांशु - जिसमें केवल होठ हिलते हैं। (3) मानस - जिस कोमन मन में जपा जाता है। चौथा - अजपाप - जो जपकर्ता के रात दिन बसा रहता। वैसे हर धर्मों का अपना ईष्ट मंत्र की माला के माध्यम से जप करते हैं। फारसी सम्प्रदाय के 105 मणियों की माला होती है। सनातन, बौद्ध, जैनों के 108 मणियों की माला होती है। मुस्लिम में 101 की, जैन में नवकार मंत्र के 5 पद के 108 गुणों की माला है। मंत्र साधना एक जगह भले खड़े खड़े या बैठे बैठै, या बीमारी अवस्था हो, सोये, सोये भी हो सकती है। किन्तु चलते चलते, स्कूटर चलाते, वाहन चलाते नहीं। भगवान ने कहा, एक समय में एक काम ही होता है। चित्त का स्वभाव है। या तो स्कूटर चलाएंगे या माला। बाजार जाएं तो एक काम की जगह 10 काम करना दूसरी बात है।