चित्तौड़गढ़। आचार्यश्री नानेश रामेश समता भवन गांधीनगर में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए महासती निरंजनाश्री म.सा. ने कहा कि तीर्थंकर प्रभु को हमारे हृदय में विराजित करने से हमारी बाहरी प्रवृतियां दूर होती है। ऐसा मानतुंग आचार्य ने अपने चित्त अध्यवसायों से प्रभु को अपने हृदय में विराजित किया और भक्तामर स्रोत की महान रचना की जो आज पूरी श्रद्धा से सभी जैन धर्मावलम्बी एवं अन्य भी प्रार्थना के रूप में पठन करते हैं, कंठस्थ करके सुमिरन करते है। छोटे-छोटे नियमों से हमारा जीवन संयमित हो जाता है जैस रात्रि भोजन त्याग से वात पित्त कफ का शमन हो जाता है। यह शारीरिक लाभ है परन्तु आध्यात्मिक लाभ बहुत ज्यादा है। सहज में लगभग पूरी रात्रि 12 घण्टे का आहार त्याग हो जाता है। ऐसे अनेक नियमों से जीवन सुखमय बनता है। तप त्याग से आत्मा कर्मों के आवरण से हल्की हो जाती है। जैसे जैसे परिणाम शुद्धि होती है वैसे वैसे आत्मा से कर्म बंधनों का हल्कापन हो जाता है।
जीवन यूं न गंवाओ, तप की शरण में आओ, पूर्यषण पर्व आया है... भजन के माध्यम से धर्मसभा को भावविभोर किया। धर्मक्रिया दोष रहित होनी चाहिए। पूरी सजगता एवं यतनापूर्वक धर्मक्रिया होने से अहिंसा का पालन होता है जो महान निर्जरा का कारण होता है। मन वचन काया की एकाग्रता और उसके भावों का होना ही सच्ची साधना आराधना है। सच्ची आराधना से बहुत कम भव होकर संसार से मुक्त हो सकते हैं। साधना आराधना में प्रवेश हेतु अठारह ही पापों से बचना होगा। बालकों को नीडर बनाना चाहिए। बचपन से जीव का अजीव क्या पाप क्या पुण्य क्या समझाना चाहिए एवं सद्प्रवृतियां संस्कारों हेतु निरन्तर सत्संग सत्साहित्य के माध्यम से सद्प्रेरणा करें तो जीवन में शान्ति का राज्य होगा। आत्मा की सद्गति हो इसलिए साधना आराधना युक्त जीवन हो।
प्रवचनसभा को पूर्व में महासती सुसिद्धिश्री ने संबोधित करते हुए कहा कि हुकुम संघ के पूर्वाचार्य जवाहरलालजी म.सा. का जीवन साधना युक्त था। उन्होनें समाज को दिशा दी। आचार्य विनोबा भावे, महात्मा गांधी एवं सरदार पटेल भी उनका सत्संग करते और मार्गदर्शन प्राप्त करते थे। विशुद्ध साधना आराधना से उनका जीवन महकता था। उनके प्रवचनों की पुस्तकें प्रवचन जवाहर किरणावलीयों के नाम से उपलब्ध हैं जो वर्तमान समय में भी शान्ति समता का वातावरण बनाने के लिए प्रासंगिक है। हम सभी उनसे प्रेरणा लें। महासती सुप्रतिभाश्री म.सा. ने अंतगड़ सूत्र के वाचन में सुर्दशन श्रावक और अर्जुन मालाकार की साधना आराधना एवं भगवान महावीर के सत्संग का विवरण सुनाया। महासती श्री प्रेमलता म.सा. ने प्रत्याख्यान करा, मंगलपाठ सुनाया। धर्मसभा का संचालन महामंत्री आदित्येन्द सेठिया ने किया। महिला समिति की पूर्व अध्यक्षा
मंजु अब्बाणी, बहुमण्डल अध्यक्षा रीना पोखरना, रेखा बोरदिया, समता युवा संघ अध्यक्ष मनीष भड़कत्या एवं साधुमार्गी संघ कोषाध्यक्ष शंकर सुराना, पूर्व महामंत्री सुशील अब्बाणी, पूर्व अध्यक्ष अशोक नाहर ने सभी से अधिकाधिक धर्मलाभ की अपील की।