चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में आयोजित धर्म सभा में उपस्थित धर्मानुरागियों से रूबरू होते हुए शांतक्रांति संघ की विदूषी महासति शीलप्रभा ने बताया कि इस लोक में एक मात्र निर्ग्रंथ प्रवचन ही सार्थक होकर पूर्ण सत्य है एवं जो इस पर पूरी श्रद्धा, रुचि, प्रतीति रखते हुए समर्पण भाव से इस अनुसार जीवन जीने हेतु संकल्पित होता है वह आत्म विकास के रास्ते पर चलते हुए मुक्ति की दिशा में अग्रसर होने वाला बन जाता है। जैसे वज्रनंदी ने प्रभु महावीर से श्रावक के 12 व्रत स्वीकार किए और दृढ़ संकल्प शक्ति के साथ समर्पण भाव से उनका पालन करते हुए उच्च कोटि के श्रमणोपासक बन कर अपनी आत्मा को भावित करते हुए सबके सामने पूर्ण श्रद्धा, समर्पण और संकल्प शक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया वो सबके लिए अनुकरणीय है।
इससे पूर्व साध्वी सत्यप्रभा ने कहा कि वितरागी महापुरुषों का आलंबन लिए बिना वितरागी नहीं बना जा सकता है अतः इस हेतु सम्यक पुरुषार्थ करते रहें। धर्म सभा में महासती पुण्यप्रिया ने साधु साध्वी की आहारचर्या के विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए समझाया गया। साध्वी रत्ना राजश्री म सा ने स्वीटी भड़कत्या को 10 उपवास, संतोष भड़कत्या एवं मंजू कच्छारा को 9 उपवास, आशा पटवारी को 7 उपवास एवं अन्य विभिन्न प्रत्याख्यान कराने के बाद मंगल पाठ सुनाया। संचालन संघ मंत्री इंद्रेश कोठारी ने किया।